पादहस्तासन

पादहस्तासन की योगविधि और लाभ

योगा भारत मे प्राचीन काल से तकरीबन 5000 वर्ष से राज कर रहा है, अब इसे अंतराष्ट्रीय दर्जा भी प्राप्त है। हर साल 21 जून की तारीख को मनाए जाने वाला यह पर्व लोग अपनी सेहत के लिए बनाते हैं। योगा का अर्थ आत्मा का परमात्मा से मिलन होना। उसी योग में से उतपन्न हुआ पादहस्तासन। पादहस्तासन यह शब्द तीन शब्द का जोड़ है जो है ‘पाद’, ‘हस्त’ और ‘आसन’ यानी पैर, हाथ और स्थिति। इसे हैंड अंडर फ़ीट पोज़ भी कहा गया है। आइए जानते है इसके फायदे और करने की क्रिया।

पादहस्तासन करने की क्रिया (कैसे करें) और इसके फायदे

अगर आपने योगा में सूर्यनमस्कार किया हो, तो उसीकी तीसरी क्रिया को ही पादहस्तासन कहा जाता है जहाँ खड़े होकर आगे की ओर झुका जाता है और अपने दोनों हाथों से दोनों पैरों को छुआ जाता है। हठ योग के 12 आसनों में से एक यह आसन पेट के उभरती चर्बी को घटाने के लिए उपयुक्त है तथा पाचन शक्ति के साथ आपके कद को बढ़ाने में भी उपयोगी है। बिना देर किए यह आसन करने की शुरुआत करें अगर आपको इसे करने में समस्या होती है तो आप दीवार का सहारा भी ले सकते हैं। यूँ तो कहा गया है कि इस आसन की मुद्रा धारण करते हुए आपका पैर बिल्कुल सीधा होना चाहिए पर फिर भी किसी कारण वश आपका हाथ पैर को छूने में असमर्थ है तो थोड़ा घुटने झुका सकते हैं। हाथ को पैर पर छुए और 10 सेकंड तक रोक के रखें।

यह आसन आपको तनाव से भी काफी हद तक मुक्ति देता है। इसको नियमित करने से आपके शरीर मे रक्त परिसंचरण में सुधार पाया गया है। लिवर और किडनी हमारे शरीर के अभिन्न अंग है जिसकी सेहत का भी ध्यान इस आसन से भरपूर किया जाता है। पादहस्तासन अंग में आए हुए खिंचाव को मिटाने के भी काम आता है और कई पेशेवर नृत्यकला में नाम कमाने वाले इसका नियमित प्रयास करते है ताकि उनका शरीर में लचीलापन उतपन्न हो सके।

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