राशिफल

aaj ka rashifal
मेष (21-मार्च से 19-अप्रैल तक)
मेष

21/3 - 19/4

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वृषभ (20-अप्रैल से 20-मई तक)
वृषभ

20/4 - 20/5

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मिथुन (21-मई से 20 जून तक)
मिथुन

21/5 - 20/6

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कर्क (21-जून से 22-जुलाई तक)
कर्क

21/6 - 22/7

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सिंह (23-जुलाई से 22-अगस्त तक)
सिंह

23/7 - 22/8

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कन्या (23-अगस्त से 22- सितम्बर तक)
कन्या

23/8 - 22/9

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तुला (23-सितम्बर से 22-अक्टूबर  तक)
तुला

23/9 - 22/10

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वृश्चिक  (23-अक्टूबर से 21-नवम्बर तक)
वृश्चिक

23/10 - 21/11

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धनु (22-नवम्बर से 21-दिसम्बर तक )
धनु

22/11 - 21/12

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मकर (22-दिसम्बर से 19-जनवरी तक)
मकर

22/12 - 19/1

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कुम्भ (20-जनवरी से 18-फरवरी तक)
कुम्भ

20/1 - 18/2

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मीन (19-फरवरी से 20-मार्च तक)
मीन

19/2 - 20/3

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16 सोमवार व्रत और कथा करने की सम्पूर्ण विधि

शिवजी को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए सोमवार व्रत करना सर्वोत्तम उपाय है। हिंदू मान्यता के अनुसार सप्ताह के सभी सात दिन विभिन्न देवी देवताओं के प्रतीक माने जाते हैं। सप्ताह के सभी सात दिन अलग-अलग देवी-देवताओं को समर्पित है। जैसे सोमवार के अधिपति देवता शिवजी हैं मंगलवार के अधिपति देवता हनुमान जी हैं। बुधवार के अधिपति देवता श्री गणेश जी हैं। बृहस्पतिवार के अधिपति देवता श्री हरि विष्णु जी हैं। शुक्रवार के अधिपति देवी श्री लक्ष्मी जी व शनिवार के अधिपति देवता भैरव जी है। रविवार के अधिपति देवता सूर्य देव हैं। शिवजी को प्रसन्न करने के लिए सोमवार व्रत बेहद फलदाई होता है। शिव जी के सभी भक्तों सोमवार व्रत करने के लिए लालायित रहते हैं। विशेषकर कुंवारी कन्याएं सुयोग्य वर प्राप्ति के लिए सोमवार का व्रत रखती हैं।
विशेष मनोकामना पूर्ति के लिए सोलह सोमवार व्रत रखना विशेष लाभप्रद होता है। इसलिए आइए जानते हैं सोलह सोमवार व्रत और कथा करने की संपूर्ण विधि।

शिव जी की आरती | ॐ जय शिव ओंकारा in Hndi

शिव,भोलेनाथ, महादेव, पशुपतिनाथ, या कहो नटराज या महाकाल। हर नाम शिव जी का व्यक्तित्व दर्शाता है। वह अपने भोलेपन के लिए जितना जाने जाते हैं उतना ही अपने क्रोध के लिए भी। 

सोमवार व्रत के नियम

तीन भिन्न प्रकार में बांटा गया यह व्रत के नाम सामान्य सोमवार व्रत, सोम्य प्रदोष व्रत एवं सोलह सोमवार के नाम से जाना जाता है जिसकी आत्मा तो एक है परन्तु भिन्न शक्ल एवं नाम से जानते हैं। कहने का मतलब है कि इन सब व्रत के नियम एक ही हैं परन्तु कथा एवं शुभ समय अलग हैं। इन व्रत में आपको शिव जी एवं माँ पार्वती की पूजा करें तथा पाठ का उच्चारण करें याद रहे सभी व्रत के पाठ भिन्न हैं। व्रत के दौरान आप एक ही समय भोजन कर सकते हैं।

सोमवार व्रत की पूजा विधि

सोमवार व्रत की पूजा विधि काफी सरल है। इसके लोई पहले स्वंय को पूर्ण रूप से स्नान करके साफ कर लें और धोए हुए कपड़ो का धारण कर लें ताकि घर के मंदिर में बैठ पूजा की शुरुआत कर सके। दीप जलाकर,घंटी बजाएं और अपने माता-पिता और गुरु को प्रणाम करें जिनका आपके जीवन मे महत्वपूर्ण योगदान रहा है। जिनके प्रयास से हम भगवान तक पहुंच पाते हैं । उसके पश्चात मां पार्वती एवं शिव जी को प्रणाम कर अपनी पूजा आरम्भ करें। शिव चालीसा का पाठ के पश्चात ‘ॐ नमः शिवाय’ की एक माला का जाप करें। फिर शिव जी की आरती करें, याद रहें आरती खड़े होकर ही करें। कथा का पाठ आप अपने सहूलियत के मुताबिक कहीं भी कर सकते हैं परन्तु ध्यान रहें कि अगर आप कथा घर के मंदिर में करेंगे तो आरती से पहले कथा का स्थान हो।

सावन शिवरात्रि 2020 – शिवरात्रि पर भोलेनाथ करेंगें कष्टों को दूर

भगवान शिव का जितना ही गुस्सा होना जाना जाता उससे अधिक उनका प्रेम अपने भक्तों के प्रति जग जाहिर है। तभी शिव जी को कई नामों से नवाजा गया है जिसमे भोलेनाथ प्रमुख हैं।

मंदिर में पूजा करने के तरीके

मंदिर में आप सबसे पहले श्रद्धा पूर्वक शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। पहले गणेश जी को जल चढ़ाएं, फिर माँ पार्वती को, फिर कार्तिकेय जी को जल चढ़ाकर नंदी जी को जल चढ़ाएं। फिर शिव जी को इस प्रकार जल चढ़ायें कि जल पहले शेषनाग जी पर गिरे और फिर शिवलिंग पर। फूल भी इसी क्रम में चढ़ाएं एवं चंदन का तिलक भी इसी क्रम में । अब यदि आप धूपबत्ती लाये हैं तो धूपबत्ती करें। अब यदि आपने घर में कथा नहीं की तो यहाँ बैठ कर कथा पाठ करें। इसके पश्चात् पहले वाले क्रम में ही गणेश जी फिर माँ पार्वती, फिर कार्तिकेय जी फिर नंदी जी के चरण छू कर आशीर्वाद लें। और अंत में शिव जी के आगे सर झुककर उनका भी आशीर्वाद लें।

व्रत में आहार के नियम

भगवान कभी अपने भक्तों को कष्ट में नहीं देख सकते। यह वहम लोगो मे है कि अगर वह भोजन नहीं करेंगे स्वयं को भूखा रखेंगे तो वह शिव जी को प्रसन्न कर सकेंगे परन्तु ऐसा नहीं । दिन में एक बार भोजन करें। तामसिक भोजन न करें जैसे, लहसुन, प्याज, अधिक मसाले वाला भोजन, देर से पचने वाला भोजन इत्यादि। अपने आप पर नियंत्रण रखें। यदि भूख न हो तो कुछ न खाएं। जो भी खाएं, अपने आसपास मौजूद लोगों को भी दें। एक बार पूछें अवश्य। अकेले खाना, छिपाकर खाना उचित नहीं। किसी दूसरे का भोजन आप नहीं कर सकते, किन्तु यदि अपना भोजन किसी के साथ बाँटना पड़े तो बाँट लें। शाम की पूजा विधि में यही विधि को इसी क्रम में करना है पहले शिव चालीसा, फिर 1 माला ‘ॐ नमः शिवाय’ फिर शिव जी की आरती। इसके पश्चात् प्रसाद ग्रहण करें एवं भोजन करें।

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चन्द्र ग्रहण का सभी राशियों पर प्रभाव 5 जून 2020

चन्द्र ग्रहण का सभी राशियों पर प्रभाव 5 जून 2020

इस बार जून और जुलाई माह में तीन बार ग्रहण योग बन रहा है। ग्रहण अंतरिक्ष की एक प्राकृतिक घटना है। जिसका प्रभाव सभी जीव-जंतुओं पर पड़ता है। ग्रहण के माध्यम से प्रकृति मनुष्य को सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं। प्रकृति में परिवर्तन, सृजन और विनाश एक महत्वपूर्ण घटना है। जिसका घटित होना प्रकृति में संतुलन बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है। मनुष्य स्वभाव से यथास्थिति वादी होता है। किसी भी प्रकार के परिवर्तन में खुद को असहज महसूस करता है। इसीलिए ग्रहण काल में घटित होने वाली घटनाएं मानव को असहज कर देती हैं। परंतु विद्वान लोग मानते हैं कि परिवर्तनों को स्वीकार कर लेने से आत्मिक उन्नयन हीं होता है

 5 जून 2020 को आंशिक चंद्र ग्रहण लगेगा। जिसका काम या ज्यादा प्रभाव हम सभी प्राणियों पर पड़ेगा। आइए जानते हैं कि किस राशि के ऊपर किस प्रकार का प्रभाव होने वाला है।

यहां पर हम सूर्य राशि के आधार पर प्रभावों का अध्ययन करेंगे। सूर्य राशि के निर्धारण के लिए जन्म की तिथि को आधार बनाया जाता है। यह अध्ययन चंद्र राशि वालों पर भी सामान रूप से पड़ेगा। परंतु चंद्र राशि का निर्धारण जन्म कुंडली के आधार पर ही संभव है। इसलिए हम यहां सूर्य राशि के आधार पर फल कथन प्रस्तुत कर रहे हैं।

मेष राशि (21 मार्च से 19 अप्रैल) के लोगों पर 5 जून 2020 को लगने वाले चन्द्र ग्रहण का प्रभाव

5 जून 2020 को लगने वाले चन्द्र ग्रहण का प्रभाव मेष राशि के सभी लोगों पर मिश्रित फल दायक है। मेष राशि के अंतर्गत सबसे ज्यादा प्रभाव उन लोगों पर पड़ेगा जिनका जन्म किसी भी वर्ष के 1 अप्रैल से 10 अप्रैल के मध्य होगा। इस दौरान आप को अपने अभिव्यक्ति कौशल की समीक्षा करनी पड़ेगी। प्रकृति आपको संवाद के तरीकों को निखारने के लिए प्रेरित कर रही है। प्रकृति के संकेतों और संदेशों को अपने अंतर्मन से सुनने का प्रयास करें। अपने स्थापित विचारों को बदली हुई परिस्थितियों के अनुरूप समावेशित करें। एक अच्छा श्रोता ही अच्छा वक्ता बन सकता है। इसलिए दूसरों की बात को भी महत्व देने की आवश्यकता है। अपने भाइयों और बहनों के साथ अगर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो रही है, तो उसे अतिशीघ्र सुलझाने का प्रयास करें। विवाद का कारण इस दौरान संवाद की गलतफमियां हो सकती हैं।

    शिक्षा और रोजगार के अवसर मिलेंगे। जिसका लाभ लेने के लिए अतिरिक्त श्रम की जरूरत पड़ेगी। स्वास्थ्य के विषय में इस समय पैर, घुटना, कान, नेत्र और कंधा आदि से संबंधित तकलीफ हो सकती हैं। जिसके उपचार हेतु खानपान, व्यायाम, योगासन आदि के माध्यम से स्वास्थ्य लाभ की संभावना ज्यादा है।

प्यार और रोमांस आदि के संबंध में आपको दीर्घकालिक लक्ष्यों को प्राथमिकता देनी है। रोमांस और प्रतिष्ठा दोनों के बीच में एक स्वास्थ्यवर्धक संतुलन बनाए रखें। किसी सुखद इच्छा के प्रति अपनी बेचैनी और आवेश को नियंत्रण में रखें।

गर्भवती महिलाओं को चंद्रग्रहण के संदर्भ में अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना है। खानपान आदि में अनुशासन का ध्यान रखें। और अपने शरीर में जल की मात्रा का संतुलन बनाए रखें।

वृषभ (20 अप्रैल- 20 मई) राशि के लोगों पर 5 जून 2020 को लगने वाले चन्द्र ग्रहण का प्रभाव

वृषभ राशि के अंतर्गत सबसे ज्यादा प्रभाव उन लोगों पर पड़ेगा जिनका जन्म किसी भी वर्ष के 1 मई से 10 मई के मध्य होगा। इस दौरान आप को अपने आय और व्यय के बीच है संतुलन बनाने पर ध्यान देना है। अपने सुविधा क्षेत्र (comfort zone) और दूसरों के प्रति अपने दायित्व के बीच अंतर्विरोध हो सकता है। आप इस समय अपने घर में आराम करने के मूड में है। परंतु जिम्मेदारियां आपके सुविधा क्षेत्र को भंग करने का प्रयास करेंगी। इन जिम्मेदारियों अथवा देनदारियों को पूरा किए बगैर आप खुद को सहज नहीं रख पाएंगे। इसमें आर्थिक लेनदेन जैसे विषय भी महत्वपूर्ण है।

उच्च स्तरीय मित्रों के साथ वैचारिक क्लेश की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती हैं। प्रकृति आपको सुख और वासना पर नियंत्रण रखने की अपेक्षा करेगी। कुछ रिश्ते जो धूमिल पड़ चुके हैं उनके पुनः सक्रिय होने की संभावना है। ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए आपका दृष्टिकोण ना तटस्थ होना चाहिए। और आपको यह ध्यान रखना चाहिए कि यह समय एक दिन गुजर जाएगा। और आपको अपने व्यक्तित्व के विकास के दीर्घकालिक लक्ष्य पर पुनः लोटना होगा।

कुल मिलाकर इस ग्रहण का एक प्रबल संदेश यह है कि खुद पर विश्वास और निर्भरता बढ़ाई जाए। आर्थिक और भावनात्मक रूप से आत्मनिर्भर बनाना इस ग्रहण का संदेश है।

इस संदेश के ऊपर काम करने से अच्छे परिणाम मिलेंगे। और 20 जून 2020 को लगने वाले सूर्य ग्रहण के दिन से आप शांति का अनुभव करेंगे।

मिथुन ( 21 मई – 20 जून) राशि के लोगों पर 5 जून 2020 को लगने वाले चन्द्र ग्रहण का प्रभाव

मिथुन राशि के अंतर्गत सबसे ज्यादा प्रभाव उन लोगों पर पड़ेगा जिनका जन्म किसी भी वर्ष के 1 जून से 10 जून के मध्य होगा। फिर भी आंशिक रूप से सभी जाति प्रभावित होंगे। इस दौरान आपको अपनी पहचान और सामाजिक छवि को स्थापित करने के लिए प्रकृति प्रेरित करेगी। कार्य व्यापार में साझेदारी और स्थापित रिश्तो के आईने से आप अपनी छवि को देखेंगे। यह चंद्र ग्रहण आपके व्यापारिक साझेदारी, संयुक्त उद्यम, और बेहद करीबी रिश्तों के ऊपर प्रकाश डालेगा। इन सभी रिश्तो में आपकी स्थिति क्या है? आप कहां खड़े हैं? क्या आपको अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए कुछ बदलाव करने की जरूरत है?

इस परिपेक्ष में सब कुछ एक दिन में करने का प्रयास ना करें। धैर्य का परिचय दें। संयम के साथ आगे बढ़े। जैसे रास्ते में तीखे मोड़ पर अपनी गति कम करनी पड़ती है वैसे ही आपको व्यावहारिक जीवन में भी करना है।

इस चंद्र ग्रहण के बाद का समय आपको अपने व्यक्तित्व के विकास पर केंद्रित करेगा। रिश्तो के ऊपर निर्भरता किस तरीके से आप की छवि को प्रभावित कर रही है? यह स्पष्ट दिखाई देगा।

आपको अपना गुरु सोंग बनना पड़ेगा। गुरु स्वतंत्रता सिखाता है। और आपको अपने अस्तित्व की स्वतंत्रता के मार्ग तलाशने होंगे। इसके लिए आप motivation stories का सहारा ले सकते हैं।

कर्क (21जून-22 जुलाई) राशि के लोगों पर 5 जून 2020 को लगने वाले चन्द्र ग्रहण का प्रभाव

कर्क राशि के अंतर्गत सबसे ज्यादा प्रभाव उन लोगों पर पड़ेगा जिनका जन्म किसी भी वर्ष के 30 जून से 10 जुलाई के मध्य होगा। इस चंद्र ग्रहण के दौरान लगने वाली पूर्णिमा यह संकेत कर रही है क्या कि जीवन में कुछ है जो पूर्ण हो चुका है। और अब एक नई शुरुआत की जरूरत है। पुरानी चीजों को छोड़ना जब हम सीख जाते हैं, तो जीवन में नई चीजों के प्रवेश के मार्ग खुलते हैं। परंतु मानव मन के लिए तकलीफ दे यह बात होती है कि वह पुरानी चीजों से है खुद को संयुक्त कर लेता है। और फिर उनसे अलग होना मन के लिए कष्ट कारक हो जाता है। पर मन की मुक्ति का मार्ग ही यही है कि हम व्यक्तियों, वस्तुओं या परिस्थितियों से खुद को मुक्त करें। जो वस्तुओं व्यक्ति या स्थिति अब हमारे जीवन में उपयोगी नहीं रह गई है उसे त्यागने की कला सीखनी चाहिए। इसका मतलब यह नहीं है कि हम रिश्तो को तोड़ दें। पुराने रिश्ते को नई स्थितियों के साथ भी हम स्वीकार कर सकते हैं। जब हम खुद को स्वतंत्र करते हैं तो हम नई ऊर्जा से अपना पोषण करते हैं। और एक स्वास्थ्य मन ही अन्य रिश्तो को पोषण प्रदान कर सकता है।

नौकरी पेशा में लगे हुए लोगों को उच्च अधिकारी यह एहसास दिलाएंगे कि आपसे कुछ गलती हुई है। परंतु आप के संदर्भ में ऐसा नहीं है। आप जिस भी संस्था से संबंधित हैं उस संस्था और संगठन की आंतरिक स्थिति स्थिर नहीं है। आपके पास इस समय महत्वपूर्ण सूचनाओं और जानकारियों का अभाव है। इसलिए धैर्य रखें और अधिक से अधिक के सूचनाएं इकट्ठा होने तक कोई महत्वपूर्ण निर्णय ना लें

सिंह (23 जुलाई-22 सितंबर) राशि के लोगों पर 5 जून 2020 को लगने वाले चन्द्र ग्रहण का प्रभाव

सिंह राशि के अंतर्गत सबसे ज्यादा प्रभाव उन लोगों पर पड़ेगा जिनका जन्म किसी भी वर्ष के 1 अगस्त से 11 अगस्त के मध्य होगा। इस चंद्र ग्रहण के दौरान आपकी रचनात्मक कौशल का क्षेत्र, संतान की प्रगति, प्रेम संबंधों मैं आपका पक्ष और आप से संबंधित समूह और संगठन सभी प्रभावित होंगे। इसके साथ ही आपको अपनी आय और व्यय पर पैनी नजर रखनी है। इस दौरान खर्चे अप्रत्याशित होंगे जिससे आपका वित्तीय संतुलन बिगड़ेगा। साथ ही कुछ रुका हुआ धन भी मिलेगा और आर्थिक मदद भी मिलेगी। टैक्स और बीमा के प्रीमियम आदि के भुगतान को पहले से अपनी योजना में शामिल कर ले।

प्रेम संबंधों में आपको कुछ ऐसे निर्णय ले लेने पड़ सकते हैं जो आपकी इच्छा के विपरीत हो। परंतु यदि वह सभी के भलाई के लिए हैं तो उन्हें शहर से स्वीकार करें। संतान की प्रगति के विषय में आपकी योजनाएं जो भी हैं उस पर बहुत दृढ़ रहे। नई परिस्थितियों के साथ अपनी योजनाओं को नया रूप दे। नौकरी या कार्यक्षेत्र में संभव है कि आपको संगठन या समूह की बात माननी पड़े। इसी में सभी की प्रगति है आपकी योजनाएं, रचनाएं तभी धरातल पर आएंगी जब संगठन या समूह बचा रहेगा।

कन्या (23 सितंबर-22 अक्टूबर) राशि के लोगों पर 5 जून 2020 को लगने वाले चन्द्र ग्रहण का प्रभाव

कन्या राशि के अंतर्गत सबसे ज्यादा प्रभाव उन लोगों पर पड़ेगा जिनका जन्म किसी भी वर्ष के 2 सितंबर से 13 सितंबर के मध्य होगा। इस चंद्र ग्रहण के बाद अभी दो और ग्रहण लगने बाकी है।

आपकी स्थिति मजबूत है और थोड़े बहुत उतार-चढ़ाव को झेलने के लिए सक्षम है। इस चंद्र ग्रहण के दौरान आपको कार्यक्षेत्र और परिवार के बीच संतुलन बनाने की जरूरत है। कार्यक्षेत्र की स्थितियां आपको पारिवारिक जिम्मेदारियां निभाने का समय नहीं देंगी। यदि आप अपनी संतान के लिए चिंतित हैं तो भाग्य बल आपके साथ हैं। आपकी संतति की आवश्यकताएं बृहस्पति ग्रह की मदद से पूरी हो जाएंगी।

आपको माता पिता से अपेक्षित सहयोग मिलने में कठिनाई महसूस होगी। साथ ही जीवन साथी के प्रति जिम्मेदारियों को पूरा कर पाने में आप खुद को अशक्त महसूस करेंगे। परंतु यह सभी स्थितियां क्षणिक होंगी। और जल्दी ही रिश्तेदारों के सहयोग से आप इन स्थितियों को सही से संभाल लेंगे।

तुला (23 सितंबर-22 अक्टूबर) राशि के लोगों पर 5 जून 2020 को लगने वाले चन्द्र ग्रहण का प्रभाव

तुला राशि के अंतर्गत सबसे ज्यादा प्रभाव उन लोगों पर पड़ेगा जिनका जन्म किसी भी वर्ष के 3 अक्टूबर से 14 अक्टूबर के मध्य होगा। जीवन में आगे बढ़ने के लिए आपको व्यवस्था को महत्व देना है। व्यवस्था ऐसी जिसमें किसी कार्य को सुगम बनाया जा सके। जैसे यदि आपने अपने वाहन की समय पर जांच कराई है। जैसे यदि आपकी कार बाइक आदि व्यवस्थित है तो अचानक यात्रा की स्थिति बनने पर आपका काम सफल होगा। आपके घर में रखी हुई वस्तुएं यदि व्यवस्थित हैं तो आपकी दिनचर्या सरल होगी। आपके जरूरी कागजात यदि यथा स्थान रखे हैं को आवश्यकता पड़ने पर आप परेशान नहीं होंगे।

आपके सहकर्मी अधीनस्थ कर्मचारी नौकर आदि से आपको परेशानी उत्पन्न हो सकती है। इसलिए इनके ऊपर ज्यादा निर्भरता इस समय ठीक नहीं रहेगी।

किसी दीर्घ प्रतीक्षित यात्रा को अंतिम रूप देने में सफलता से राहत मिलेगी। साथ ही किसी महत्वपूर्ण समझौते या अनुबंध को पूरा होने से भी प्रशन्नता प्राप्त होगी।

भाई बहनों के साथ वाद विवाद से बचने का प्रयास करेंगे।

वृश्चिक (23 अक्टूबर-21 नवंबर) राशि के लोगों पर 5 जून 2020 को लगने वाले चन्द्र ग्रहण का प्रभाव

वृश्चिक राशि के अंतर्गत सबसे ज्यादा प्रभाव उन लोगों पर पड़ेगा जिनका जन्म किसी भी वर्ष के 2 नवंबर से 12 नवंबर के मध्य होगा। इस ग्रहण के प्रभाव में आपका व्यापार, आय, व्यय, प्रेम प्रसंग और संवाद संचार के क्षेत्र उद्दीप्त होंगे। व्यापारिक लेन-देन में आए हुए की स्पष्टता आपको परेशान कर सकती है। वित्तीय सूचनाओं के आदान-प्रदान में भ्रम की स्थिति बन सकती है। महत्वपूर्ण कागजात को संभाल कर रखें। प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त स्थगित रखें। संभव है की कुछ सूचनाएं आपसे छुपाई गई हों। लेनदारी और देनदारी में गणना करते समय कुछ गणकों के छुटने की संभावना है।

प्रेम प्रसंग में गलतफमियों से बचें। कुछ ऐसा ना करें जिससे गलतफमियां उतपन्न हों। भले ही आपकी नियत साफ हो।

संवाद के मार्ग या शब्दों के चयन में अपनी तरफ से सावधानी बरतते। और सामने वाले के शब्दों को व्यापक दृष्टिकोण से देखें।

धनु (22 नवम्बर-21 दिसम्बर) राशि के लोगों पर 5 जून 2020 को लगने वाले चन्द्र ग्रहण का प्रभाव

धनु राशि के अंतर्गत सबसे ज्यादा प्रभाव उन लोगों पर पड़ेगा जिनका जन्म किसी भी वर्ष के 2 दिसंबर से 12 दिसंबर के मध्य होगा। इस दौरान आपकी प्रतिभा और दक्षता में वृद्धि होगी। अपने बौद्धिक कौशल से अपने आसपास के लोगों को सहयोग प्रदान करेंगे। इस प्रक्रिया में आपकी पहचान सकारात्मक रूप से ऊपर उठेगी। आप के जीवन का दीर्घकालिक लक्ष्य में स्पष्टता आयेगी। इन सब के परिणाम स्वरूप आप उन् रिश्तो को अब विराम देना चाहेंगे जिन् रिश्तों से आपको बाधा पहुंच रही है।

शुरू में आप भावनात्मक रूप से काफी संवेदनशील हो सकते हैं। तत्पश्चात आप अपनी स्थिति को दृढ़ता से स्वीकार कर लेंगे। घर परिवार में क्लेश की स्थिति बनेगी जिसे आप बौद्धिक समझ से दूर करेंगे। समस्या का कारण लोगों का खुलकर बात ना करना हो सकता है। आपके बीच बचाव से शांति का मार्ग बनेगा। घर में पानी की व्यवस्था को दुरुस्त कर लें। कहीं तकनीकी खराबी हो सकती है।

मकर (22 दिसंबर-19 जनवरी) राशि के लोगों पर 5 जून 2020 को लगने वाले चन्द्र ग्रहण का प्रभाव

मकर राशि के अंतर्गत सबसे ज्यादा प्रभाव उन लोगों पर पड़ेगा जिनका जन्म किसी भी वर्ष के 1 जनवरी से 11 जनवरी के मध्य होगा। इस चंद्र ग्रहण के प्रभाव में आपको अगले एक दो महीने तक अपके शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य का विशेष महत्त्व समझ में आएगा। दैनिक क्रियाकलाप और शारीरिक मानसिक शांति के बीच संतुलन स्थापित करने की जरूरत है। कार्य अधिकता के बीच आपको यह एहसास होगा कि कुछ समय एकांत के लिए निकालना भी जरूरी है। योग और ध्यान करने से प्राप्त उर्जा का प्रयोग दैनिक क्रियाकलाप में भी होता है। यदि मन में शांति और उत्साह नहीं है तो दैनिक जीवन के काम को पूरा करने में आलस्य आता है।

अपने बेडरूम को व्यवस्थित करें। और गहरी नींद लेने का प्रयास करें। सोने से पहले थोड़ी देर तक ध्यान करने से लाभ होगा। नींद में आने वाले सपनों के माध्यम से आपकी अंतरात्मा कुछ संदेश देना चाहेंगे। नींद से उठने के बाद अपने सपनों को लिख लें।

आपका स्वास्थ्य के हीलिंग प्रक्रिया से गुजरेगा। जिसमें थोड़ा समय लगेगा। भाई बहन और पड़ोसियों के साथ संचार संवाद में संतुलन बनाए रखें।

कुंभ (20 जनवरी-18 फरवरी) राशि के लोगों पर 5 जून 2020 को लगने वाले चन्द्र ग्रहण का प्रभाव

कुंभ राशि के अंतर्गत सबसे ज्यादा प्रभाव उन लोगों पर पड़ेगा जिनका जन्म किसी भी वर्ष के 1 फरवरी से 10 फरवरी के मध्य होगा। इस चंद्रग्रहण के कारण अगले महीने तक आपके संतान की आश्यकताओं, मित्रों की अपेक्षाओं आपके वित्तीय संसाधनों और समय की उपलब्धता आदि प्रभावित होंगे। प्रेम प्रसंगों में धन की कमी कामा स्वास्थ्य और समय की उपलब्धता से कमजोर स्थितियां उत्पन्न होंगी। जो आपको कुछ भी ठीक ढंग से करने में बाधक बनेगी।

इस चंद्र ग्रहण के प्रभाव में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि आप अपनी आर्थिक स्थिति को दुरुस्त करें। साथ ही शारीरिक ऊर्जा की कमी को दूर करने के लिए कुछ पल आराम करें। अपने स्वास्थ्य की देखभाल करने के लिए भी समय निकाल ले। मित्रों की तरफ से आर्थिक सहायता की मांग हो सकती है। अभी आर्थिक लेनदेन करना सुरक्षित नहीं रहेगा। इस समय किए गए खर्चे हितकारी नहीं होंगे।

रिश्तेदारों और मित्रों के ऊपर खर्च करने से बेहतर है कि आप अपनी संतान के ऊपर खर्च करें। साथ ही जिनको गहरे मन से प्यार करते हैं उनकी जरूरतों को पूरा पहले करें।

सबसे ज्यादा समय और ऊर्जा अपने स्वास्थ्य और आराम पर खर्च करें। उसके बाद अन्य प्राथमिकताओं को तय करें। एक साथ बहुत सारे काम हाथ में लेने पर कुछ भी ठीक ढंग से पूरा नहीं कर पाएंगे। घर में दैनिक उपकरणों जैसे बिजली पानी आदि के उपकरणों को समय-समय पर चेक करते रहें। किसी गड़बड़ी की आशंका है।

मीन (19 फरवरी-20 मार्च) राशि के लोगों पर 5 जून 2020 को लगने वाले चन्द्र ग्रहण का प्रभाव

मीन राशि के अंतर्गत सबसे ज्यादा प्रभाव उन लोगों पर पड़ेगा जिनका जन्म किसी भी वर्ष के 2 मार्च से 12 मार्च के मध्य होगा। इस चंद्र ग्रहण के प्रभाव से अगले 2 महीने तक आपके पारिवारिक जीवन और कार्य क्षेत्र के बीच में असंतुलन पैदा हो सकता है। बहुत सारे कार्य है जो आपको अभी अपने व्यक्तिगत स्तर पर ही पूरा करना होगा। पर्दे के पीछे रहकर काम करना अभी के लिए जरूरी है। जिस परियोजना पर काम कर रहे हैं उस एकांत में रहकर अंतिम रूप देने का प्रयास करें। अपने कार्य को समय पर पूरा कर पाने में अभी आपको संदेह है। जो की परिस्थितियों के अनुरूप स्वाभाविक भी है। परिवार में किसी सदस्य विशेषकर माता के स्वास्थ्य की देखभाल को प्राथमिकता में रखें। इसके साथ है ही कार्यक्षेत्र और सामाजिक जिम्मेदारियों को भी निभाते रहें। व्यक्तिगत परियोजना परिवार और सामाजिक क्षेत्र तीनों के बीच में बेहतर संतुलन स्थापित करने में आप दक्ष है। आने वाले समय में आपको अपने पत्नी और संतान के स्वास्थ्य के ऊपर भी समय देना है। समय के प्रबंधन में इन सभी बातों का समावेश करने में आप सफल रहेंगे।

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Janam Kundali In Hindi by Date of Birth, Time and Place.

अब आप भी अपनी Janam Kundali In hindi अपनी मात्रभाषा में प्राप्त कर सकते है। इसके लिए केवल अपनी जन्म तिथि, जन्म का समय, जन्म स्थान और ई-मेल  हमारे साथ शेयर करना होगा और इसके उपरांत आप अपनी जन्मकुंडली आपके ई-मेल पर PDF भेज दिया जायेगा। जिसका आप प्रिंट आउट निकल सकते है। (Janam Kundali In hindi) बनाने से पहले आप के लिए यह जान लेना आवश्यक है कि Janam Kundali क्या महत्त्व है? आपके जीवन से किस प्रकार से सम्बंधित है?

ज्योतिष ज्ञान मनुष्य के जीवन के लिए बहुत ही महत्व पूर्ण है। ज्योतिष की सही जानकारी से कोई भी व्यक्ति अपने जीवन को बहुत ही आसान व सुगम बना सकता है। आधुनिक समय में बहुत सारे लोग ज्योतिष में विश्वास नहीं रखते है। इसका मुख्य करना यह है कि उन्हें ज्योतिष विज्ञान का सही ज्ञान नहीं है। 

दूसरा बड़ा कारण यह है की प्राचीन समय से कई लोग ज्योतिष शाश्त्र के नाम पर मनगढंत कहानिया सुनकर इसे केवल अपनी कमाई का श्रोत बनाया है परन्तु सही जानकारी नहीं दिया इस प्रकार से लोगो में काफी अंधविश्वास फ़ैल गया। आधुनिक समय में शिक्षित वर्ग का इस प्रकार के लोगों से तो विश्वास टूट ही  गया साथ ही उनका ज्योतिष शाश्त्र (Jyotish Sastr) से भी विश्वास ख़त्म हो गया।

ज्योतिष शाश्त्र और मानव जीवन में सम्बन्ध 

 परन्तु जो आपके दिमाग में ज्योतिष शाश्त्र को लेके नकारात्मक भावना है। उसको दूर करके हम आपको ज्योतिष शाश्त्र की सही ज्ञान देते है तथा आपको ज्योतिष शाश्त्र व मानव जीवन के बीच के संबंधो को समझाते है। जैसा की हम सभी जानते है ज्योतिष शाश्त्र में हम ब्रह्माण्ड में उपस्थित सभी ग्रहों, व नक्षत्रों की चाल व स्थिति का अध्ययन करते है।

प्रथ्वी भी ब्रह्माण्ड में उपस्थित एक गृह है।| इस प्रकार से प्रथ्वी उपस्थित समस्त मानव, जीव जंतु  सभी ब्रह्माण्ड का एक हिस्सा है।| वास्तु शाश्त्र के सामंजस्य के अनुसार ब्रह्माण्ड उपस्थिति प्रत्येक कण की  गति व स्थिति परिवर्तन का प्रभाव पूरे ब्रह्माण्ड पर पड़ता है। इस प्रकार से ब्रह्माण्ड में उपस्थिति सभी ग्रहों की चाल व स्थिति परिवर्तन मनुष्य के जीवन व प्रथ्वी पर रहने वाले समस्त को प्रभावित करता है। 

जन्म तिथि से जाने अपना राशिफल

जन्म कुंडली (janam kundali) क्या होती है?

इस प्रकार से हमारे जीवन में ज्योतिष शाश्त्र का बहुत ही महत्व है। परन्तु ज्योतिष विज्ञान (Jyotish Vigyan) के अध्ययन से पहले हमें जन्म कुंडली का अध्ययन बहुत आवश्यक है क्यूंकि ज्योतिष विज्ञानं के अध्ययन का सबसे पहला और महत्वपूर्ण चरण जन्म कुंडली (Janam Kundali) है। जन्म कुंडली के अध्ययन से पहले हमें यह जान लेना चाहिए की जन्म कुंडली क्या होती है।

तो आइये बताते है जन्म कुंडली क्या होती है? जन्म कुंडली वह प्रपत्र होता है जिसमे मनुष्य के जन्म के समय ब्रह्माण्ड के सभी मुख्य ग्रहों की स्थिति का वर्णन होता है। इसकी सहायता से ग्रहों की गति के अनुसार भविष्य में ग्रहों की स्थिति का अनुमान लगाया जाता है तथा उनसे मानव जीवन में भविष्य में होने वाले प्रभावों की गणना की जाती है।

Janam Kundali का महत्व in Hindi

अन्य किसी भी शाश्त्र या विज्ञान के अध्ययन से आप केवल भूत या वर्तमान के बारे में अध्ययन कर सकते है और उन्हें बेहतर बनाने के लिए प्रयास कर सकते है। परन्तु ज्योतिष शाश्त्र एक ऐसा विज्ञानं है जिसके अध्ययन के बाद आप अपने भविष्य के जीवन को देख सकते है तथा उससे बेहतर बनाने का प्रयास कर सकते है।

 चूँकि ज्योतिष विज्ञानं का बैकबोन जन्म कुंडली है।अतः आपके लिए जन्म कुंडली का अध्ययन भी अति आवश्यक है। जन्म कुंडली के अध्ययन हेतु जन्म कुंडली का निर्माण करना भी आवश्यक है। जिससे भविष्य में होने वाले हानि व लाभ का पूर्वानुमान लगाकर उनसे बचा जा सके है।

Difference Between Software Kundli and manual Janam Kundali In Hindi 

आजकल जन्म कुंडली प्राप्त करने के लिए विभिन्न प्रकार के ऑनलाइन सॉफ्टवेयर भी उपलब्ध है परन्तु सॉफ्टवेयर द्वारा प्राप्त कुंडली को हम यथार्थ नहीं मान सकते है क्यूंकि सॉफ्टवेयर किसी सिंगल लॉजिक या फार्मूला के अनुसार कार्य करता है परन्तु मानव जीवन या खगोलीय घटनाएँ किसी एक लॉजिक या फार्मूला के अनुसार कभी नहीं चलता है।

यहाँ पर कई सारी अलग-अलग प्रकार की परिस्थितियां होती है जिन्हें किसी एक सूत्र या शर्त में नहीं बाँधा जा सकता है। इसलिए यहाँ पर हम कुशल और अनुभवी ज्योतिषियों (Astrologers) के सहयोग से आपके लिए (Janam Kundali In hindi) सुविधा हिंदी भाषा में प्रदान कर रहे है।

आपके द्वारा दी गयी जानकारी को अपने अनुभवी ज्योतिषियों के साथ शेयर करके आपकी सही जन्म कुंडली का निर्माण करेंगे। जिससे आपके जीवन की समस्त गतिविधियों की यथार्थ जानकारी प्राप्त करना संभव हो पायेगा तथा आप उससे होने वाले हानि लाभ का सही पूर्वानुमान लगा पाएंगे और उससे बचने के उपाय करने में सक्षम रहेंगे।

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Annaprashan | अन्नप्राशन संस्कार हिंदू धर्म में सातवां संस्कार है

कहते हैं कि बंगाल में जन्मा व्यक्ति काफी मीठा स्वभाव होता तभी बंगाल के व्यक्ति बहुत अच्छे गायक बनते हैं ऐसा इसीलिए क्योंकि बंगाल की मिठाइयां की खासियत पूरे विश्व में है। एक कहावत बहुत प्रचलित है “जैसा खाया अन्न, वैसा होगा मन”। अर्थात जैसे भोजन तुम करोगे वैसा ही तुम्हारा स्वभाव होगा। अगर आप ज्यादातर सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं तो आपके अंदर सात्विक (Satvik) गुण आएंगे और अगर आप तामसिक भोजन करेंगे तो आपके अंदर तामसिक (Tasmik) व्यवहार की ओर जाएंगे।

इन भोजन से होते दोषों के बुरे प्रभाव को कम करने हेतु ही नवजात को पैदा होने के शुरुआती 6 महीने के बाद ही Saptam Sanskar किया जाता है जिसे हम अन्नप्राशन भी कहते हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार Annaprashan का जीवन में अलग ही महत्त्व है। 6 महीने तक केवल माँ का दूध ही शिशु के लिए आवश्यक बताया है और उसके बाद अन्न ग्रहण करने पर उसे अन्नप्राशन संस्कार कहा जाता है। इसके कई महत्व भी है , जाने इसके बारे मे।

Annaprashan संस्कार का महत्व

माता के गर्भ में रहते हुए जातक में मलिन भोजन के जो दोष आते हैं उनके निदान व शिशु के सुपोषण हेतु शुद्ध भोजन करवाया जाना चाहिये यह वाक्य “अन्नाशनान्मातृगर्भे मलाशाद्यपि शुद्धयति” का अर्थ है। अन्न किसी जीवन में क्या महत्व देता है, क्या खुशी देता है, यह आप किसी गरीब व्यक्ति से पूछे जिन्हें एक वक्त की रोटी भी नसीब नही हो पाती।

अन्न अपके शरीर को तन्दरुस्त और मजबूत बनाने में सहायता करती है, ताकि हर तमाम परेशानियों को झेल पाओ। अन्न के महत्व का एक अंश, कथा के तौर पर काफी प्रसिद्ध है।

यह अंश महाभारत (Mahabharat) का वह प्रसिद्ध अंश के ठीक बाद कि घटना है जब स्वंय कन्हैया एक औरत द्रोपदी के चीरहरण हुआ उसे बचाने हेतु प्रकट हुए। भीष्म पितामह जब पांडवों को उपदेश दे रहे थे, अच्छी बातों का ज्ञान दे रहे थे, तभी उनकी यह बात सुनते हुए अचानक से द्रोपदी जोर जोर से हसने लगती है, जिससे भीष्म पितामह का ध्यान भंग हो जाता है और वह उपदेश छोड़ द्रोपदी से विनर्मता से उसके हसने का कारण पूछते हैं। द्रोपदी ने कहा की पितामह आपकी अच्छी उपदेश, बहुत अच्छे होते हैं और सुनने में भी अच्छा लगता है, परन्तु जब यह सोचती हूँ कि आपका यह उपदेश उस वक्त कहाँ गया था जब मेरा चीरहरण भरी सभा मे हो रहा था, तब कहाँ खो गई थी यह आवाज, तब कहाँ विलुप्त हो गई थी यह धर्म की बातें, इसीलिए मुझे आज आपकी यह बातें सुनकर हसी आ गई। भीष्म पितामह यह बात सुनकर उतर देते है “पुत्री, उस वक्त मैं जो अन्न का ग्रहण करता था, वह अन्न दुर्योधन का था उसी अन्न से मेरे अंदर का बहता रक्त बनता था। जैसा पापी वह दुर्योधन था वैसा ही अन्न मुझे प्राप्त हुआ। परन्तु अर्जुन के बाणों ने वह पापी रक्त भ दिया, अब मैं वही कहता हूँ जो धर्मानुकूल हैं।

कैसे निभाए Annaprashan संस्कार

Annaprashan संस्कार सातवां संस्कार है। जिसकी क्रिया नवजात शिशु के 6 महीने पश्चात ही शुरआत होता है। इन 6 महीनों में केवल माँ का दूध ही नवजात के लिए उपयुक्त है। जिसे गुजरने के बाद शिशु को भात, दही, शहद और घी आदि को मिश्रित कर खिलाया जाता है। शुद्ध और साफ अन्न शिशु के विकास का रथ निर्धारित करता है।

शिवौ ते स्तां व्रीहीयवावबलासावदोमधौ।

एतौ यक्ष्मं वि बाधेते एतौ मुंचतौ अंहस:।।

यह मंत्र का उच्चारण माता पिता को शिशु को मिश्रित प्रसाद चटकाया जाता है ।

इस मंत्र का अर्थ है कि यह प्रसाद शिशु को शक्ति और पुष्टकारक हो।

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Bure Sapno ka Matlab और उनका फल (swapn fal)

सपना वह है जो हम वास्तविक जिंदगी से अलग हटकर हो भी देखते है। यह सपने दो प्रकार के होते है। एक जो हम सोते हुए देखते है और दुसरे जो हम जागते हुए देखते है। जागते हुए देखे जाने वाले सपने हमारी सोच और इच्छा पर निर्भर करते है परन्तु सोते हुए दिखने वाले सपने अपने आप से मानसिक स्थिति और भविष्य में होने वाली शुभ और अशुभ घटनाओ पर निर्भर करते है। इन सपनो का मतलब (Sapno ka Matlab) इन्ही से संबंधित होता है।

सोते हुए दिखने वाले सपनो में कई प्रकार के सपने हम देखते है। इनमे सुहावने सपने, बुरे सपने, चिकित्सा वाले सपने, आवर्ती सपने, भविष्यवाणी वाले सपने, सांकेतिक सपने इत्यादि सम्मिलित है| हम एक समय में अक्सर इन्ही में से किसी एक या एक से अधिक प्रकार का सपना देखते है। आइये इन सपनो के बारे में थोडा विस्तृत रूप से बताते है।

सुहावने सपनो का मतलब (Suhavane sapno ka matlab):

सुहावने सपने वे सपने होते है जब सपना देखने वाले को ज्ञात हो जाता है कि वह सपना देख रहा है परन्तु वह फिर भी सोता रहता है और सपने का आनंद लेता है तथा सपने में कार्य के परिणाम को प्रभावित करता है। इस प्रकार से देखे गए सपनो को सुहावने या स्पष्ट सपने कहते है। अधिकतर लोग सपने का अहसास होते ही खुद को जगा लेते है इस प्रकार के सपने सुहावने सपनो के अंतर्गत नहीं आते है।

बुरे सपनो का अर्थ (sapno ka arth)

बुरे सपने प्रायः नाम के अनुसार के परेशान करने वाला सपना है जो सपना देखने वाले मनुष्य को परेशान या भयभीत कर देता है। और इसी डर और चिंता के कारण मनुष्य अपनी निद्रा से जाग्रत अवस्था में आ जाता है। यह सपने मनुष्य के वास्तविक जीवन की घटनाओ की आघात और स्थितियों की प्रतिक्रिया हो सकती है। हम जीवन के विशेष स्थिति को अनदेखा कर देते है जिन लोगो को लगातार बुरे सपने आते है वो मनोरोग, बुरी दवाओं के अनुभव, आत्म हत्या जैसी चीजो पर विचार करने वाले लोग हो सकते है।

सपने में सांप, खुश हो जाएंगे आप

सांप को खजाने का रक्षक भी माना गया है। स्वप्न में सांप देखने को शुभ संकेत के रूप में लिया जाता है, परन्तु कई दृश्य नकारात्मक होने पर मजबूर कर देते हैं। जानते हैं सांप का सपने में दिखना शुभ है या अशुभ।

चिकित्सा सम्बन्धी सपनो का मतलब (sapno ka matlab)

कई स्वप्न सम्बन्धियों का मानना है कि चिकित्सा सम्बन्धी सपने हमें स्वस्थ्य सम्बन्धी समस्याओं से बचने और बीमार होने पर ठीक होने में मदद कर सकते है। वे मानते है कि हमारा शरीर सपनो के माध्यम से हमें बताने में सक्षम है कि शारीरिक लक्षण दिखने से पहले हमारे शरीर में कुछ सही नहीं है।

बार बार एक ही सपने (Recurring Dreams) के मतलब

आवर्ती सपने अपने विषय और शीर्षक में थोड़े से बदलाव् के साथ बार बार आते रहते है। कई बार ये सकारात्मक सपने हो सकते है परन्तु अधिकतर ये बुरे सपनो के श्रेणी में आते है। ऐसे सपने अधिकतर इसलिए आते है क्यूंकि वास्तविक जिंदगी में कोई हिस्सा छूट जाता है जो सपने में आकार बार बार याद दिलाता रहता है। जब एक बार आप इन समस्याओं से छुटकारा पा लेते है तो इन सपनो की पुनरावृत्ति होनी बंद हो जाते है।

सांकेतिक सपने

कई बार सपने हमारे जीवन के लिए कुछ सन्देश लेकर आते है। जिनका हमारी वास्तविक जिंदगी से कुछ न कुछ सम्बन्ध होता है। ऐसे सपनो को सांकेतिक सपने कहते है। इन सपनो को पहचानने के लिए हमें ज्योतिष विज्ञानं का सहारा लेना पड़ता है। ज्योतिष शाश्त्र द्वारा इन सपनो का मतलब (Sapno ka Matlab) विस्तृत रूप से समझाया जाता है।

सपनो का मतलब (Sapno ka matlab)

  • पानी देखना
  • वाहन देखना
  • खुद को फसा हुआ देखना
  • दांत निकलते हुए देखना
  • बच्चे देखना
  • पशु देखना
  • पीछा किये जाते हुए देखना
  • खुद की मौत देखना
  • धार्मिक प्रतीक देखना
  • परीक्षा लेते हुए देखना
  • वस्त्र देखना
  • भोजन देखना
  • दानव या राक्षस
  • इमारतें और घर देखना
  • लोगों को मारते हुए देखना
  • पैसा देखना
  • सेक्स करते हुए देखना
  • गिरते हुए देखना
  • सार्वजनिक रूप से नग्न होना
  • किसी प्रसिद्ध व्यक्ति से मिलना
  • बेवफाई देखना
  • देर होते देखना
  • खो जाना
  • एक कार दुर्घटना देखना
  • गर्भवती होना (लड़कियों)
  • एक खाली कमरा खोजते हुए देखना
  • आपकी सबसे गुप्त इच्छा
  • बिना बढ़े चलते हुए देखना
  • बहुत सारा पानी (बाढ़) देखना
  • एक फिल्म को फिर से बनाते हुए देखना
  • स्लीप पैरालिसिस हो जाना
  • सांप देखना
  • मकड़ियां देखना
  • ततैया या सींग देखना
  • कुत्ते देखना
  • खुद को गीला करना
  • खुद को उड़ाते हुए देखना
  • आग देखना
  • किताबें पढ़ते हुए देखना
  • खुद पर चीटियाँ रेंगते हुए देखना
  • रोते हुए देखना
  • किसी मृत रिश्तेदार को देखना
  • एक पूर्व प्रेमी देखना
  • किसी चीज से छिपना
  • आपके घर में बर्गलर
  • छुरा घोंपा जाना
  • शॉट होना
  • घोड़े देखना
  • किसी को चूमना
  • वास्तव में ऊंची कूद
  • अगवा होना
  • बस या फ्लाइट गुम होना
  • जेल देखना
  • नौकरी छोड़ना
  • भागते हुए देखना
  • सुपर अमीर होना
  • डूबते हुए देखना
  • आप एक रोलरकोस्टर पर हैं
  • टैटू बनवाते हुए देखना
  • एलियंस द्वारा लिया जा रहा है
  • किसी को एक संदेश है
  • सार्वजनिक रूप से यौन होना
  • किसी चीज़ की खोज करना
  • एक पहाड़ पर चढ़ना
  • प्यार में पड़ना
  • बौछार देखना
  • अदृश्य होना
  • जूता खोना
  • किसी जानवर से बात करना
  • ड्रग्स लेते हुए देखना
  • तीखा खाते हुए देखना
  • एक पुराने दोस्त को देखना
  • समय में वापस यात्रा
  • सड़ा हुआ भोजन खाना
  • एक अंग गुम
  • गुप्त गलियारा या कमरा
  • एक जंगल में खो गया
  • अंधेरे में खो जाना
  • जोम्बी देखना
  • कीचड़ या कंक्रीट में फंसना
  • सार्वजनिक बोल
  • अपराध करना
  • किसी प्रसिद्ध व्यक्ति से मिलना
  • प्राकृतिक आपदा
  • गलत बटन दबाना
  • एक तर्क होना
  • धनवान बनना
  • बचपन का घर देखना
  • वास्तव में बीमार होना
  • किसी बात पर हँसना
  • सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा होना
  • एक पालतू जानवर की मृत्यु
  • अपना फोन खोना
  • हाई अलर्ट देखना
  • भविष्य की भविष्यवाणी करते हुए देखना
  • मिठाई खाते हुए देखना
  • वे हमेशा से ऐसे ही हैं’
  • एक वाद्य बजाना
  • पैदा होते हुए देखना
  • छिपते हुए देखना

स्वप्नफल (swapn fal)

ऐसा माना जाता है कि रात्रि के पहले प्रहर में देखे गए सपनों के फल एक साल बाद पूरे होते है, दुसरे प्रहर में देखे गए सपने के फल छः महीने बाद तीसरे प्रहर के बाद देखे गए सपने तीन महीने के बाद तथा अंतिम प्रहर में देखे गए सपने का फल एक महीने में मिलता है। ब्रह्म मुहूर्त में देखे गए सपने का फल अतिशीघ्र होता है। ऐसे सपनों का फल अधिकतम दस दिनों में मिलता है। दिन में देखे गए सपने निरर्थक होते है। अगर अच्छा सपना देखा है आपने तो तो उसके बाद सोना नहीं चाहिए। इसके बाद स्नान करके पूजन व दैनिक कार्य करने चाहिए।

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इन सात ऊर्जा चक्रों पर काबू पा लिया तो हर मनोकामना होगी पूरी

ऊर्जा चक्र (Urja Chakra) हर मनुष्य के भीतर होते हैं जो मेरूदंड में अवस्थित होते है और मेरूदंड जिसे अंग्रेजी में Spinal Column के नाम से जानते हैं। मेरुदंड के आधार से ऊपर उठकर खोपड़ी तक फैले होते हैं। इन्हें उर्जा चक्र कहते हैं, क्योंकि संस्कृत में चक्र का मतलब वृत्त, पहिया या गोल वस्तु होता है। इनका वर्णन हमारे उपनिषदों में मिलता है।

प्रत्येक चक्र को एक विशेष रंग में प्रदर्शित किया जाता है एवं उसमे कमल की एक निश्चित संख्या में पंखुड़ियां होती हैं। हर पंखुड़ी में संस्कृत का एक अक्षर लिखा होता है। इन अक्षरों में से एक अक्षर उस चक्र की मुख्य ध्वनि का प्रतिनिधित्व करता है।

हर व्यक्ति के भीतर सात चक्रों का समावेश पाया जाता है। जिन्हें ऊर्जा चक्र कहकर भी सम्बोधित किया जाता है और यह विश्वास दिलाया जाता है कि अगर व्यक्ति ने इन सात ऊर्जा चक्र पर काबू पा लिया तो उसकी हर मनोकामना पूर्ण होती है। चक्र शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ पहिया या घूमना को कहा गया है।

योग में चक्र प्राण या आत्मिक ऊर्जा के केन्द्र होते हैं। ये नाड़ियों के संगम स्थान भी होते हैं। यूँ तो कई चक्र हैं पर 5-7 चक्रों को मुख्य माना गया है। यौगिक ग्रन्थों में इनहें शरीर के कमल भी कहा गया है। क्योंकि इसकी आकृति फूलों के समान मानी गई है। कहते हैं कि चक्र शक्ति केंद्र या ऊर्जा की कुंडली है जो कायिक शरीर के एक बिंदु से निरंतर वृद्धि को प्राप्त होनेवाले फिरकी के आकार की संरचना (पंखे प्रेम हृदय का आकार बनाते हैं) सूक्ष्म देह की परतों में प्रवेश करती है। सूक्ष्म तत्व का घूमता हुआ भंवर ऊर्जा को ग्रहण करने या इसके प्रसार का केंद्र बिंदु है।

ऊर्जा चक्र (Urja Chakra) का अन्य वर्णन

ऊर्जा चक्र का ज्ञान होना यह बहुत बड़ा विषय है, जिसे सभी मानव प्रजातियां अपनी सोच समझ के मुताबिक समझते हैं । जैसे कि परमहंस स्वामी महेश्वरानंद चक्र का वर्णन इस तरह करते हैं:

ब्रह्मांड से अधिक मजबूती के साथ ऊर्जा खींचकर इन बिंदुओं में डालता है, इस मायने में यह ऊर्जा केंद्र है कि यह ऊर्जा उत्पन्न और उसका भंडारण करता है। मुख्य नाडि़यां इड़ा, पिंगला और सुषुन्ना (संवेदी, सहसंवेदी और केंद्रीय तंत्रिका तंथ) एक वक्र पथ से मेरूदंड से होकर जाती है और कई बार एक-दूसरे को पार करती हैं। प्रतिच्छेदन के बिंदु पर ये बहुत ही शक्तिशाली ऊर्जा केंद्र (Saktishali urja kendra) बनाती है जो चक्र कहलाता है। मानव देह में तीन प्रकार के ऊर्जा केंद्र हैं। अवर अथवा पशु चक्र की अवस्थिति खुर और श्रोणि के बीच के क्षेत्र में होती है जो प्राणी जगत में हमारे विकासवादी मूल की ओर इशारा करता है। मानव चक्र मेरूदंड में होते हैं। अंत में, श्रेष्ठ या दिव्य चक्र मेरूदंड के शिखर और मस्तिष्क के शीर्ष पर होता है।

चक्रों के चित्रण करने के तरीके

ऋषियों द्वारा यह कहा गया है कि चक्रों का चित्रण दो तरीके से किया जाता है, जो निम्मनलिखित हैं।

  • फूलों की तरह
  • चक्र की तरह

पहले एक चक्र की परिधि के चारों ओर एक विशेष संख्या में पंखुडि़यों को दिखाया जाता है। बाद में एक निश्चित संख्या की तिली वृत को कई खंडों में बांटती है जिससे चक्र, पहिया या चक्के के समान बन जाता है। हरेक चक्र में एक विशेष संख्या के खंड या पंखुडि़यां होती हैं।

चक्रों के बारे में अधिकतम मूल जानकारियां उपनिषदों से मिलती है, इनका समय बताया जाना कठिन है क्योंकि माना जाता है कि लगभग हजारों साल पहले पहली बार 1200-900 BCE में इन्हें लिखे जाने से पूर्व वे मौखिक रूप से अस्तित्व में थे।

कैसे कार्य करते हैं यह मूल उर्जा चक्र

114 यह संख्या है उन चक्रों की जिसे योग और आयुर्वेद में मूल चक्र का दर्जा प्राप्त है । इनमे से भी 7 चक्रों को ही मूल आधार चक्र माना गया है। आयुर्वेद में नाड़ियों के संगम या उनके एक दूसरे से मिलन को ही चक्र कहा गया है। वैसे तो इन नाड़ियों के मिलन स्थल अधिकतर त्रिकोणाकार ही होते है लेकिन फिर भी इन्हे चक्र कहा जाता है।

दरअसल शरीर में नाड़ियों के इन त्रिकोणीय मिलन बिन्दुओं को चक्र कहने के पीछे इनकी कार्यशीलता या निरंतरता को माना जाता है। शरीर में मौजूद ये त्रिकोण मिलन बिंदु शरीर के एक आयाम से दूसरे आयाम की ओर गतिशीलता को दर्शाते है इसलिए इन्हे चक्र की उपाधी से नवाजा गया है। इन चक्रों का मूल कार्य शरीर की चेतना या ऊर्जा को नीचे से ऊपर की ओर हस्तांतरित करना है।

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कब कौन सा श्राद्ध (Shradh) है? श्राद्ध कर्म विधि

भारत एक विशाल देश जिसकी सुंदरता इसके भीतर मनाए जाने वाले अनगिनत त्यौहार हैं। भारत विश्व भर में प्रसिद्ध है सिर्फ इसीलिए नहीं कि यहाँ के व्यक्ति दिमागी रूप से हर कार्य के लिए सक्षम हैं परन्तु साथ साथ मे भारत ही ऐसा देश है जहाँ हर धर्म में अपने माता पिता का आदर करना सिखाया गया है हालांकि यह भिन्न भिन्न व्यक्तियों के ऊपर है कि वह इनको मान्यता देते हैं या नहीं परन्तु यहाँ अधिकतर मनुष्य माता पिता को ही यह सुंदर सी दुनिया देखने का श्रेय देते हैं।

श्राद्ध कर्म विधि हिन्दूधर्म के अनुसार, प्रत्येक शुभ कार्य के प्रारम्भ में माता-पिता, पूर्वजों को नमस्कार प्रणाम करना हमारा कर्तव्य है, हमारे पूर्वजों की वंश परम्परा के कारण ही हम आज यह जीवन देख रहे हैं, इस जीवन का आनंद प्राप्त कर रहे हैं। श्राद्ध (Shradh) हमारे पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करने का एक सनातन वैदिक संस्कार (Sanatan vaidik sanskar) हैं।

जिन पूर्वजों के कारण हम आज अस्तित्व में हैं, जिनसे गुण व कौशल, आदि हमें विरासत में मिलें हैं। उनका हम पर न चुकाये जा सकने वाला ऋण हैं। उन्होंने हमारे लिए हमारे जन्म के पूर्व ही व्यवस्था कर दी थी। वे हमारे पूर्वज पूजनीय हैं , उन्हें हम इस श्राद्ध पक्ष में स्मरण कर उनके प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करते हैं। वास्तव में, वे प्रतिदिन स्मरणीय हैं। श्राद्ध पक्ष विशेषतः उनके स्मरण हेतु निर्धारित किया गया हैं। इस धर्म में, ऋषियों ने वर्ष में एक पक्ष को पितृपक्ष का नाम दिया, जिस पक्ष में हम अपने पितरेश्वरों का श्राद्ध, तर्पण, मुक्ति हेतु विशेष क्रिया संपन्न कर उन्हें अर्ध्य समर्पित करते हैं।

श्राद्ध में करें यह नियम

वैसे तो सच्ची श्रद्धा और समर्पण से श्राध कर्म विधि करें तो पितृ प्रसन्न होते हैं, परंतु कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो श्राद्ध के सभी पुण्य प्राप्त होते हैं। हिन्दू धर्म अनुसार पितर लोक को दक्षिण स्थित कहा गया है इसीलिए दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके श्राध कर्म विधि सम्पूर्ण करेंगे तो अच्छा होगा। यह अवश्य ध्यान रखें कि जब भी आप पिंड दान करें तो पिला या सफेद वस्त्र धारण कर लें यह शुभ माना जाता है।  जो इस प्रकार श्राद्धादि कर्म संपन्न करते हैं, वे समस्त मनोरथों को प्राप्त करते हैं और अनंत काल तक स्वर्ग का उपभोग करते हैं। श्राद्ध सदैव दोपहर के समय ही करें। प्रातः एवं सायंकाल के समय श्राद्ध निषेध कहा गया है। पितृ पक्ष के दौरान श्राद्ध या तर्पण करते समय काले तिल का प्रयोग अवश्य करना चाहिए, क्योंकि शास्त्रों में इसका बहुत महत्व माना गया है। जिस दिन श्राद्ध करें उस दिन पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें। श्राद्ध के दिन क्रोध, चिड़चिड़ापन और कलह से दूर रहें। पितरों को भोजन सामग्री देने के लिए मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग किया जाए तो अच्छा है। केले के पत्ते या लकड़ी के बर्तन का भी प्रयोग किया जा सकता है।

श्राद्ध कर्म विधि पक्ष में यह कार्य न करें

श्राद्ध पक्ष के दौरान कई सारी बातों और नियमों का पालन करना जरूरी होता है। ऐसा शास्त्र भी कहते हैं। लेकिन इसी के विपरीत कुछ ऐसे भी कार्य होते हैं, जिन्हें श्राद्ध पक्ष के दौरान करना निषेध है। लेकिन यदि कोई व्यक्ति ऐसा करता है तो उसे तमाम दु:खों और तकलीफों से गुजरना पड़ता है। शास्त्र बताते हैं कि श्राद्ध पक्ष के दौरान मसूर की दाल, धतूरा, अलसी, कुलथी और मदार की दाल का प्रयोग निषेध है। इसके अलावा नशीले पदार्थों के सेवन और तामसिक भोजन करने से भी बचना चाहिए। इसके अलावा शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि श्राद्ध पक्ष (Shradh Paksh) के दौरान शरीर पर तेल या साबुन का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इसके अलावा इत्र का भी प्रयोग वर्जित है। श्राध कर्म विधि के दौरान नए घर में प्रवेश की भी मनाही है। इसके पीछे यह तर्क दिया जाता है कि पितरों की जहां पर मृत्यु हुई होती है वह उसी घर में जाते हैं लेकिन जब उन्हें वहां कोई नहीं मिलता तो उन्हें काफी तकलीफ होती है। शास्त्र कहते हैं कि यदि श्राद्ध पक्ष में निषेध बातों को व्यक्ति नहीं मानता तो उसे दुख, तकलीफ और कलह का सामना करना पड़ सकता है।

श्राद्ध कर्म विधि (Shradh karm vidhi) की तिथियां

13 सितंबर- पूर्णिमा श्राद्ध

14 सितंबर- प्रतिपदा

15 सितंबर-  द्वितीया

16 सितंबर- तृतीया

17 सितंबर- चतुर्थी

18 सितंबर- पंचमी, महा भरणी

19 सितंबर- षष्ठी

20 सितंबर- सप्तमी

21 सितंबर- अष्टमी

22 सितंबर- नवमी

23 सितंबर- दशमी

24 सितंबर- एकादशी

25 सितंबर- द्वादशी

26 सितंबर- त्रयोदशी

27 सितंबर- चतुर्दशी

28 सितंबर- सर्वपित्र अमावस्या

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