ज्योतिष शास्त्र : जन्म कुंडली में सूर्य के होने का प्रभाव और उपाय

ज्योतिष शास्त्र : जन्म कुंडली में सूर्य के होने का प्रभाव और उपाय

ज्योतिष शास्त्र : जन्म कुंडली में सूर्य

विज्ञान के अनुसार सूर्य हाइड्रोजन और हीलियम गसों का बना हुआ विशालकाय गोला है परन्तु  हिन्दू धर्म में सूर्य को भगवान् मानकर सूर्य की पूजा की जाती है| ज्योतिष विज्ञानं के अनुसार सूर्य सभी ग्रहों का स्वामी है अतः ज्योतिष शास्त्र में सूर्य का बहुत अधिक महत्व है| ज्योतिष शास्त्र में जन्म कुंडली की गणनाराशिफल की गणना के लिए सूर्य के प्रभाव का अध्ययन करना बहुत आवश्यक है| तो आइये देखते है की जन्म कुंडली के प्रत्येक भाव में सूर्य की उपस्थिति से मनुष्य के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है? औसत रूप से सूर्य लगभग एक माह में दुसरे भाव में गोचर करता है|

ज्योतिष शास्त्र : कुंडली के प्रथम भाव में सूर्य का प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र

सूर्य जब आपके कुंडली के प्रथम भाव को प्रकाशित करता है अर्थात जब जन्म कुंडली के प्रथम भाव में होता है तो यह जातक   व्यक्तित्व, पहचान, उपस्थितीत और बाहरी व्यवहार में बदलाव् लाता है| कुछ दिनों के लिए जातक सामान्य सीमाओं को पार करके अपनी व्यक्तिगत विचारों को बढ़ावा देता है| मनुष्य अपने बीते हुए समय को पीछे रखकर भविष्य की योजनाओं पर विचार करने के लिए तैयार रहता है| यह समय जातक के लिए एक सम्मिलित होकर कार्य करने के लिए सही नहीं है| कई क्षेत्रों के कार्य जातक को इस समय अकेले ही करने चाहिए| नेतृत्व करने के लिए सर्वोत्तम समय है| जातक को इस माह में आत्म-केन्द्रितता से बचना चाहिए| इस समय जातक आत्मविश्वास से भरा हुआ होता है और उर्जा स्तर भी बढ़ रहा होता है| इस एक माह के समय में जातक को पूरी तरह से नए और अन्वेषण युक्त कार्य करने चाहिए| इस समय में जातक को बहुत ही आसानी से अपनी पहचान और उद्देश्य के सही तथ्यों का ज्ञान हो जाता है|

ज्योतिष शास्त्र : कुंडली के द्वतीय भाव में सूर्य का प्रभाव

जब सूर्य कुंडली के द्वतीय भाव में होता है तो अगले कुछ दिनों के लिए जातक अपना ध्यान केवल अपने सुविधा स्तर निजी जीवन पर ज्यादा केन्द्रित करता है| इस समय जातक को अपने निजी वित्त और अपनी पेशेवर स्थिति पर अधिक ध्यान देने की जरुरत है|  जातक को अपने सुविधा स्तर, सुरक्षा स्तर और और व्यक्तिगत मूल्य पर ध्यान नहीं देना चाहिए| इस समय जातक को अपने कार्य और उपलब्धि पर ध्यान देने की जरुरत है| अपनी समस्त उर्जा को अपने काम और वित्त पे प्रयोग करें| किसी बाहरी वस्तु की तरफ ध्यान देना आपके लिए अतिव्यय हो सकता है| इस समय जातक को केवल जरुरत की चीजें ही खरीदनी चाहिए और मितव्यता से बचना चाहिए| यह अपव्यय हानिकारक नहीं है परन्तु इससे बचना ज्यादा संतुष्टि कारक साबित होगा| वर्षकाल का यह समय आपके लिए आनंदमय नहीं रहेगा|

ज्योतिष शास्त्र : कुण्डली के तृतीय भाव में सूर्य का प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र

जीवन के इस समय चक्र में जातक को अपने भाई, बहनों, पड़ोसियों, करीबी रिश्तेदारों, दोस्तों और सहकर्मियों के द्वारा बहुत ही महत्व पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा| इस समय जातक नयी चीजों की खोज और जांच करने, नए सम्बन्ध स्थापित करने में और आस पास के वातावरण में ध्यान देने में व्यस्त रहता है| इस समय थोडा सा अन्य लोगो पर समय और ध्यान दे और अपने लिए उनके प्रयासों को देखें| इस समय जातक सामान्य से थोडा ज्यादा उत्सुक और सचेत है| इस समय जातक अपने व्यावसायिक कार्यों और कागजी कार्यों में व्यस्त हो सकता है| वर्तमान समय के वातावरण को ग्रहण करने में थोडा ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है| इस समय चक्र में बड़े रिस्क न लेकर छोटी चीजों को समाप्त करना ज्यादा लाभदायक रहेगा| इस समय आपको अपने विचारो को अभिव्यक्त करने की आवश्यकता है| इस वक्त जातक संसाधनों से परिपूर्ण रहता है|

ज्योतिष शास्त्र : कुण्डली के चर्तुर्थ भाव में सूर्य का प्रभाव

सूर्य जब कुंडली के चतुर्थ भाव को प्रभावित कर रहा होता है तो विशेष रूप से जातक के घर-परिवार पर प्रभाव पड़ता है| इस समय जातक का ध्यान घर, परिवार, पूर्वज, रिश्तेदार, संपत्ति और उत्तराधिकार इत्यादि पर अधिक रहता है| इन सब पर ही जातक गर्व महसूस करता है| इस समय जातक सुरक्षा और स्वयं के अनुभवों में ही ध्यान मग्न रहता है| जातक इस समय संबधों की गहराई की ख़ोज करता रहता है| जातक को इस समय घर के नेतृत्व का भार भी उठाना पढ़ सकता है| परिवार के सदस्यों से प्रतिस्पर्धा का माहौल संभव है| परन्तु इन सब से बचने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि संबंधों की मजबूती प्रदान करने में अपनी सारी उर्जा निवेश करें| अपने परिवार के बीच अपने लिए विस्वास बनाने का सबसे अच्छा मौका है इसका लाभ लें| बाहरी दुनिया में खोये रहने के बजाय अपने घर सबसे सुरक्षित स्थान अपने घर वापस लौट जाएँ| घरेलु मामलों में फसे रहने के बजाय उस आधार को मजबूत करें जो आपको सहयोग और वृद्धि प्रदान करेगा|

ज्योतिष शास्त्र : कुण्डली के पंचम भाव में सूर्य का प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र

घर- भाव को प्रकाशित करने के बाद जब सूर्य आपके पंचम भाव को प्रकाशित करेगा तो यह समय आपके घर से बाहर निकलने का होगा| आपके लिए आपकी योग्यता और रचनाओं को अभिव्यक्त करने का समय होगा| यह समय आपके लिए  पूरे वर्ष में सबसे ज्यादा आनंदित करने वाला होगा| आपका खुशनुमा मिजाज़ और आनंदित रहना आपकी रचनात्मक शैली को अभिव्यक्त करने में सबसे महत्त्व पूर्ण रहेगा| इस समय जातक का स्वभाव एक छोटे बच्चे के सामान चंचल रहेगा| इस समय जातक दुसरो का ध्यान अपने और आकर्षित करने में प्रयासरत रहेगा| वर्ष के इस समय चक्र में आप सबसे ज्यादा आनंदित और रोमांचक महसूस करेंगे| इस समय आपके शौक, बच्चों के साथ समय बिताना, पसंदीदा खेल खेलने का मौका, इत्यादि सुअवसर प्राप्त होंगे| इस समय आप सामान्य से ज्यादा चंचल और रोमांटिक रहेंगे|  परन्तु यह समय आपके लिये सिर्फ आनंद लेने का ही नहीं है अपितु थोड़े से खतरे उठाने का भी है| थोड़े से रिस्क उठाइए और आगे बढ़ने के लिए खुद को प्रेरित करें|

ज्योतिष शास्त्र : कुण्डली के षष्टम भाव में सूर्य का प्रभाव

सूर्य जब आपके षष्टम भाव को प्रकाशित करता है तो यह आपके कार्य और स्वास्थ्य की दिनचर्या को प्रभावित करता है| इस समय चक्र के दौरान आप अपने कार्य पर गर्व महसूस करेंगे| इस समय चक्र में आप कई समस्यायों को अपने पुराने कुछ अनुभवों और योग्य और अयोग्य चीजों के सही चुनाव से ख़त्म करने में सफल होंगे| यह समय जातक के लिए अपनी कुशलताएँ बढाने, व्यवस्थित रहने और स्वस्थ्य के प्रति सजग रहने का समय है| इस समय आप अपनी दिनचर्या को बेहतर बनाने का प्रयास करें| आपका अहंकार और आत्म-सम्मान आपके कार्य और सेवा में सहयोग प्रदान करेगा|  यह समय आपके जीवन को क्रमबद्ध करने का है तथा उन छोटी-छोटी चीजो पर ध्यान देने का समय है जो आगे चल कर बड़ी होती है| आपके समक्ष सबसे बड़ी उपलब्धि बेकार चीजों से छुटकारा पाना है| इस समय आप कार्य कुशलता और कार्य की ऊँचाई की खोज कर सकते है| इस समय यथार्थता आपका लक्ष्य होंना चाहिए| इस समय सूर्य आपके शारीरिक स्वस्थ्य, रिश्तों की स्थिति, और अपने शरीर व दिमाग को प्रकाशित करेगा|

ज्योतिष शास्त्र : कुण्डली के सप्तम भाव में सूर्य का प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र

सप्तम भाव साधारणतया शादी का भाव होता है| अतः वर्ष के इस समय चक्र में जातकअपने मस्तिष्क में चल रहे विचारों को साझा करने व अपने आप को समझाने हेतु एक साथी की जरुरत महसूस करता है| साथी हमेशा आपको आपकी कमियों  से परिचित करता रहता है| यह समय दुसरो के द्वारा आपको अपनी सामर्थ्य को महसूस करने का है| इस समय आप अपनी रुचियों या कार्यों और सामाजिक जीवन या साथी के प्रति संतुलन बनाने का प्रयास करें| इस समय आप के अन्दर अहंकार की भावना का अंत हो चुका है| इस समय आपको अन्य लोगो के सहयोग की आवश्यकता है परन्तु हो सकता है की अन्य लोग भी आपसे सहयोग की आशा करते है लेकिन इस समय आपके अकेले चलना सही नहीं है बल्कि बेहतर यह है कि आप लोगो को अपने साथ ले लें| परिस्थितियों के अनुसार जातक को कूटनीति अपनानी चाहिए| आपके सहयोगी और मिलन-सारस्वभाव  लोकप्रियता बढ़ेगी|

ज्योतिष शास्त्र : कुण्डली के अष्ठम भाव में सूर्य का प्रभाव

अष्ठम भाव में सूर्य आपके जीवन के कुछ भागों को प्रकाशित करता है जिसमे आप कुछ बदलाव, पुनर्निर्माण, पैसे से सम्बंधित श्रोत, व्यसन, व्यक्तिगत वृद्धि, और कर सम्बंधित भागो को उर्जित करता है| यह माह आपके लिए बहुत अच्छा नहीं रहेगा| यह समय आपके लिए बुरी लतों को छोड़ने और वित्तीय बजट को सुधारने के लिए उपयुक्त समय है| इस समय आपके निजी मामले आपके लिये अत्यधिक महत्वपूर्ण है| इस समय आपके अन्दर एक बड़े बदलाव और अपने रहस्यों को अभिव्यक्त करने की तीव्र इच्छा है| खासतौर से यह समय खुद को विश्लेषित करके अपनी योग्यता और मजबूती को सब के समक्ष लाने का है| इस समय आप साझेदारी और संयुक्त वित्त की डील में व्यस्त हो सकते है| आपके, चीजों को अच्छी तरह से संभालने के बावजूद भी आपके कार्य को निरीक्षण की आवश्यकता है| खोज से आपको नए पदार्थ मिल सकते है जो आपको वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण कार्य में मदद करेंगे|

ज्योतिष शास्त्र : कुण्डली के नवम भाव में सूर्य का प्रभाव

इस माह में आपका ध्यान बाहरी दुनिया की तरफ रहेगा| इस माह आप बहुत ही उत्साह से भरे हुए रहेंगे और आपके मन में एक बड़ी उछाल के लिए इच्छा रहेगी| इस समय में आप जीवन का उच्चतम मूल्य और भविष्य के लिए नए अनुभव की तलाश करेंगे| चीजों का पूर्ण ज्ञान आपको लक्ष्य की तरफ पहुंचाएगा और सत्य में रूचि बढ़ेगी| छुट्टियों का विचार या नए बुद्धि विकास का कोर्स आपके लिए बेहतर साबित होगा| निकट भविष्य में आपकी खतरे लेने की कला, दैनिक कठिनाईयों से बचने की कला, किसी उच्च शिक्षा या साहसिक कार्य के दौरान स्व-अभिव्यक्ति की रूचि का गमन आपको अच्छा महसूस कराएगा|  इस समय चक्र के दौरान आप महत्वपूर्ण जानकारी और दैनिक कार्यों से दूर होने से बचें|

ज्योतिष शास्त्र : कुण्डली के दशम भाव में सूर्य का प्रभाव

इस भाव में सूर्य आपके करियर और प्रतिष्ठा को उर्जावान बनाएगा| इस समय आप अपने स्थिति व् स्थान पर केन्द्रित रहेंगे या फिर बाहरी दुनिया पर अपना ध्यान केन्द्रित करेंगे| इस समय आपकी सबसे अधिक रूचि किसी महत्वपूर्ण कार्य को सिद्ध करने में प्रयासरत है| पहचान और जिम्मेदारी दोनों आपकी तरफ ही है| आप जो महसूस कर रहे है वह सही है उससे उसका रूप दें बशर्ते यह ध्यान रखे  की इस समय आप सबसे ज्यादा स्पष्ट है| इस समय आपका अवलोकन प्रायोगिक है|

ज्योतिष शास्त्र : कुण्डली के एकादश भाव में सूर्य का प्रभाव

नवम भाव में सूर्य आपके सामाजिक भाव को प्रकाशित करता है| यह भाव आपके दोस्तों, समूहों, और सपने साकार होने का भाव है| इस समय आप सामाजिक समूहों की और आकर्षित हो रहे है| अपने मित्रों के समूहों का हिस्सा होना और सामाजिक समूहों का हिस्सा बनकर सामाजिक पकड़ को मजबूत बनाना इस समय आपके लिए महत्वपूर्ण है| यह समय आपके आपने सपनो और विचारों को नया रूप देने का है तथा भविष्य के लिए नीव निर्माण का समय है| इस समय चक्र के दौरान आप रुधिमुक्त कार्यों से प्रेरित है आपके विचार मूल और कार्य करने लोग है| आपके इस समय उच्च लोगो से संपर्क बनाने में रुचिकर है|

ज्योतिष शास्त्र : कुण्डली के द्वादश भाव में सूर्य का प्रभाव

सूर्य जब आपके बारहवें भाव को प्रकाशित कर रहा होता है तो यह आपके निर्णय बदलने और पुनर्निर्माण का समय होता है| अपनी दिनचर्या, आपसे जुड़े हुए लोग, आप से जुडी हुई वस्तुओं पर विचार कीजिये| साथ ही उन चीजों पर भी विचार कीजिये जो आपको पीछे की और ले जा रही है| इस समय आपकी प्रतियोगी क्षमता, और अहंकार की भावना का अंत हो रहा है| इस समय आप कुछ नया कार्य करने का प्रयास न करें अपितु इस समय आप केवल इस समय आप केवल अपनी उर्जा को एकत्र करें| अपनी उर्जा को आप केवल अपने आप पे खर्च करें| सूर्य के प्रथम भाव में पहुचने का इंतजार करें तथा नए कार्यों की शुरुवात के लिए उर्जा एकत्र करें|
Comments are closed.