Panchakshara Mantra

Shiva Panchakshara Mantra | पंचाक्षर मंत्र ऊँ नमः शिवाय

व्यक्ति अपने जन्म के वक्त चिंता मुक्त होता है परन्तु यह चिंता ही है जो व्यक्ति के उम्र के साथ बढ़ता रहता है। चिंता कभी तो इतनी बढ़ सकती है कि व्यक्ति हताश होकर यह सोचने लगता है कि उसकी जिदंगी में अब शांति नहीं रही सब बिखर गया है। तो इस वक्त व्यक्ति को ऐसे साथी की जरूरत होती है जिसकी मदद से वह जिंदगी को फिर से सही दिशा दिखा सके। इसी साथी के रूप में व्यक्ति का साथ देता है मन्त्र ‘ॐ नमः शिवाय’। इस मंत्र को Panchakshara Mantra भी कहा जाता है। इसका वर्णन महापुराण में भी संभव नहीं हो पाया । जानिए कैसे यह मंत्र बना सबसे शक्तिशाली मंत्र।

Panchakshara Mantra का रहस्य

भगवान शिव अग्नि स्तंभ के रूप में पाँच मुख के साथ प्रकट हुए। यह पांच मुख पृथ्वी, जल, आकाश, अग्नि तथा वायु, पाँच तत्वों को दर्शाते हैं। सर्वप्रथम जिस शब्द की उत्पत्ति हुई वह शब्द था ॐ बाकी पांच शब्द नम: शिवाय की उत्पत्ति उनके पांचों मुखों से हुई जिन्हें सृष्टि का सबसे पहला मंत्र माना जाता है यही महामंत्र है। त्रिपदा गायत्री का प्राकट्य भी इसी शिरोमंत्र से हुआ इसी गायत्री से वेद और वेदों से करोड़ो मंत्रों का प्राकट्य हुआ।

कथा Panchakshara Mantra बनने की

यह कथा की शुरुआत पार्वती माँ से होती है। पार्वती माँ अपने युवा अवस्था मे से ही शिव जी की परम भक्त रहीं परन्तु शिवजी का कभी उनपर ध्यान नहीं गया क्योंकि वह स्वयं ध्यान में व्यस्त रहते। पार्वती माँ इससे हताश हो गई, उन्हें लगता था कि शिव जी की प्राप्ति नहीं हो पाएगी, इसमें उनकी सहायता नारदजी करते हैं। नारद जी ने पार्वती माँ को उनकी श्रेष्ठता बताई की पार्वती माँ का जन्म शिव की अर्धांगिनी के रूप में ही हुआ परन्तु शिव जी अभी यह चाहते नहीं कि पार्वती माँ को स्वयं की शक्ति का आभास हो।

इतना कथन सुनकर पार्वती जी प्रसन्न हो गई, और नारद जी से शिव जी को जल्द प्रसन्न करने का उपाय पूछा। इसी के उतर में नारद जी ने Panchakshara Mantra समेत पूजा की विधि बताई। नारद जी ने कहा शिव जी को दिल से पाने के लिए प्रसन्न करने के लिए ‘ॐ नमः शिवाय’ का नियमित जाप करना चाहिए।

जिस प्रकार नारदजी ने कहा उसका पालन करते हुए पार्वती माँ ने बड़ी कठिनाई का सामना करने के बावजूद पार्वती जी ने मंत्र का तप नहीं त्यागा। इसका फल स्वरूप पार्वती जी को शिव जी की प्राप्ति हुई और शिव जी ने पार्वती माँ को उनकी शक्ति से रूबरू कराया। इसपर पार्वती माँ ने प्रशन में शिव जी से मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का रहस्य पूछा कि क्यों है यह इतना शक्तिशाली? इसपर शिव जी कहते हैं कि इसका महत्व 100 वर्षों में भी नहीं कहा जा सकता है परन्तु शिव जी मंत्र का महत्व संक्षेप में बताने को राजी हो गए।

जब समाज मे प्रलय आती हैं तो सब नष्ट हो सकता है परन्तु बचते हैं तो सिर्फ शिव जी, बाकी सब पदार्थ प्रकृति में लीन हो जाते हैं। इन्ही पंचाक्षर मंत्र में सब वेद, शास्त्र सुरक्षित रहते हैं तथा भगवान शिव दो रूपों में रहते हैं

कहा जाता है जो भी इस पंचाक्षर मंत्र का जप करते रहेंगें तो उनके भीतर स्वयं शिव जी होंगे जो उनकी हर इच्छा के साथ हर मुसीबत से निकालेंगे, इंसान अपने पापों से मुक्त हो जाएगा।

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