हिन्दू नव वर्ष

हिन्दू नव वर्ष – जानें नव संवत्सर का इतिहास और महत्व

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भारत मे नव वर्ष बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है, 31 दिसंबर की रात से शुरू होता जलसा अगले दिन 1 जनवरी तक मनाया जाता है, परन्तु यह खुशी यह जलसा अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक होता है। यह हमारे भारत देश की सबसे बड़ी विडंबना है जिन अंग्रेज़ो ने हमारे देश भारत मे 200 वर्ष तक राज किया, और अखंड भारत को दो हिस्सों में बांट कर चले गए हम उन्ही के खुशी का जलसा करते हैं वह भी उन्ही के ढंग से। परन्तु भारत मे युवा वर्ग के लोग जिनकी उम्र 18 से 35 तक के बीच की है या यूं कहें जिनकी 1990 की पैदाइश है वह हमारे त्योहार की तिथि और उसकी अहमियत नहीं जानते या नही जानना चाहते। भारतीय त्योहार एवं जरूरी तारीख धीरे धीरे विलुप्त होने लगी है यह केवल दिवाली और होली तक सीमित रह गई है। इससे पहले यह पूर्ण रूप से विलुप्त हो जाए हमें हर उम्र के व्यक्ति को हमारे भारत मे बनाए जाने त्योहार एवं उससे जुड़ी जरूरी बाते बताए ताकि वह ज्ञान सागर में डुबकी लगाकर स्वंय को गौरवांवित हो सके।

कब होता है हिन्दू नव वर्ष

नव संवत्सर के नाम से जाना जाने वाला हिन्दू नव वर्ष की चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से होता है। सूर्य और चंद्रमा के गणना के अनुसार भारतीय कैलेंडर इसकी तिथि तय करते हैं। भारत की ताकत  हर विश्व मे हर जगह लोहा माना गया है, इसकी छवि यह भारत कैलेंडर भी प्रस्तुत करता है। माना जाता है कि दुनिया के हर देश के कैलेंडर भारत के कैलेंडर का ही रूप होता है। साल में 12 महीने होना और सप्ताह में 7 दिन होना का अध्याय भी भारत कैलेंडर में विक्रमादित्य काल से प्रचलित है और इसी की नकल आज पूरा विश्व कर रहा है।

भारत मे प्रचलित

भारत मे हर राज्य के व्यक्ति में सनकर्तिक विविधताएं देखने को मिल जाती है , इसी कारण भारत मे अनेक काल गणनाएं माने जाते हैं जैसे कि विक्रम संवत, शक संवत, हिजरी सन, ईसवीं सन, वीरनिर्वाण संवत, बंग संवत आदि. ऊपर उल्लेख किये गए विक्रम संवत है जिसे हम नव संवत्सर कहते है।

नव सवंत्सर कहो या विक्रम संवत

ज्योतिषियों की माने तो विक्रम संवत को

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