सोमवार व्रत

सोमवार व्रत करने की सम्पूर्ण विधि

हिन्दू मान्यता में हफ्ते के सात दिन देवी देवंताओ के नाम होते हैं अतः रविवार यानी सुर्य देव को शनिवार शनि देव को ठीक उसी प्रकार सोमवार को भक्त शिव जी का दिवस मानते हैं। शिव जी जिनका भक्तों के लिए भोलापन और क्रूर इंसानों के लिए उनका क्रोधित रूप सब में बेहद प्रसिद्ध है। शिव जी का अन्य नाम भोलेनाथ भी है क्योंकि यह देखा गया है कि भोले बाबा को प्रसन्न करना बेहद आसान है और उनसे आशीर्वाद रूपी वरदान प्राप्त करना भी। इसीलिए भक्त इन्हें रिझाने का कोई मौका नहीं छोड़ते। उन्ही में से एक प्रयास भक्त सोमवार के दिन व्रत रख करते हैं। जानते हैं इस व्रत के बारे में।

व्रत के नियम

तीन भिन्न प्रकार में बांटा गया यह व्रत के नाम सामान्य सोमवार व्रत, सोम्य प्रदोष व्रत एवं सोलह सोमवार से जाना जाता है जिसकी आत्मा तो एक है परन्तु भिन्न शक्ल एवं नाम से जानते हैं। कहने का मतलब है कि इन सब व्रत के नियम एक ही हैं परन्तु कथा एवं शुभ समय अलग हैं। इन व्रत में आपको शिव जी एवं माँ पार्वती की पूजा करें तथा पाठ का उच्चारण करें याद रहे सभी व्रत के पाठ भिन्न हैं। व्रत के दौरान आप एक ही समय भोजन कर सकते हैं।

सोमवार व्रत की पूजा विधि

सोमवार व्रत की पूजा विधि काफी सरल है। इसके लोई पहले स्वंय को पूर्ण रूप से स्नान करके साफ कर लें और धोए हुए कपड़ो का धारण कर लें ताकि घर के मंदिर में बैठ पूजा की शुरुआत कर सके। दीप जलाकर,घंटी बजाएं और अपने माता-पिता और गुरु को प्रणाम करें जिनका आपके जीवन मे महत्वपूर्ण योगदान रहा है। जिनके प्रयास से हम भगवान तक पहुंच पाते हैं । उसके पश्चात मां पार्वती एवं शिव जी को प्रणाम कर अपनी पूजा आरम्भ करें। शिव चालीसा का पाठ के पश्चात ‘ॐ नमः शिवाय’ की एक माला का जाप करें। फिर शिव जी की आरती करें, याद रहें आरती खड़े होकर ही करें। कथा का पाठ आप अपने सहूलियत के मुताबिक कहीं भी कर सकते हैं परन्तु ध्यान रहें कि अगर आप कथा घर के मंदिर में करेंगे तो आरती से पहले कथा का स्थान हो।

मंदिर में पूजा करने के तरीके

मंदिर में आप सबसे पहले श्रद्धा पूर्वक शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। पहले गणेश जी को जल चढ़ाएं, फिर माँ पार्वती को, फिर कार्तिकेय जी को जल चढ़ाकर नंदी जी को जल चढ़ाएं। फिर शिव जी को इस प्रकार जल चढ़ायें कि जल पहले शेषनाग जी पर गिरे और फिर शिवलिंग पर। फूल भी इसी क्रम में चढ़ाएं एवं चंदन का तिलक भी इसी क्रम में । अब यदि आप धूपबत्ती लाये हैं तो धूपबत्ती करें। अब यदि आपने घर में कथा नहीं की तो यहाँ बैठ कर कथा पाठ करें। इसके पश्चात् पहले वाले क्रम में ही गणेश जी फिर माँ पार्वती, फिर कार्तिकेय जी फिर नंदी जी के चरण छू कर आशीर्वाद लें। और अंत में शिव जी के आगे सर झुककर उनका भी आशीर्वाद लें।

व्रत में आहार के नियम

भगवान कभी अपने भक्तों को कष्ट में नहीं देख सकते। यह वहम लोगो मे है कि अगर वह भोजन नहीं करेंगे स्वयं को भूखा रखेंगे तो वह शिव जी को प्रसन्न कर सकेंगे परन्तु ऐसा नहीं । दिन में एक बार भोजन करें। तामसिक भोजन न करें जैसे, लहसुन, प्याज, अधिक मसाले वाला भोजन, देर से पचने वाला भोजन इत्यादि। अपने आप पर नियंत्रण रखें। यदि भूख न हो तो कुछ न खाएं। जो भी खाएं, अपने आसपास मौजूद लोगों को भी दें। एक बार पूछें अवश्य। अकेले खाना, छिपाकर खाना उचित नहीं। किसी दूसरे का भोजन आप नहीं कर सकते, किन्तु यदि अपना भोजन किसी के साथ बाँटना पड़े तो बाँट लें। शाम की पूजा विधि में यही विधि को इसी क्रम में करना है पहले शिव चालीसा, फिर 1 माला ‘ॐ नमः शिवाय’ फिर शिव जी की आरती। इसके पश्चात् प्रसाद ग्रहण करें एवं भोजन करें।

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