माणिक्य रत्न

माणिक्य रत्न धारण करने की विधि और महत्व

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पृथ्वी जो कि सौर मंडल का ग्रह है । इसी पर 195 देश हैं और सभी देशों का राज सिहांसन राजा के पास है जो अपने देश में कानून और उस देश की आर्थिक स्थिति को देखता है और उसमें समय समय पर सुधार करता है । वैसे ही सप्ताह के सात दिन का राजा रविवार को संयुक्त रूप से नियुक्त किया जाता है क्योंकि यह एक मात्र दिन है पूरे विश्व भर में जिसमें व्यक्ति स्वयं को समय दे पाता है या अपने परिवार के साथ समय बिता पाता है । वैसे ही अगर विषय रत्न के बारे में हो तो राजा होने का तमगा सूर्य रत्न माणिक्य को है ।

सूर्य रत्न माणिक्य की परिभाषा

सूर्य रत्न माणिक्य को रत्नों का राजा कहा गया है, अर्थात यह रत्न काफी अनमोल माना गया है । यह रत्न सूर्य ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है । इसे सूर्य के कमजोर व पत्रिकानुसार स्थिति जानकर इस रत्न को धारण करने का विधान है। इसके बारे में एक धारणा यह है कि माणिक की दलाली में हीरे मिलते हैं। सूर्य का रत्न माणिक्य बेहद ताकतवर रत्न है और नीलम के समान ही इसका भी बहुत जल्दी प्रभाव दिखता है। माणिक्य कुरुन्दम समूह का रत्न है और एल्युमिनियम ऑक्साइड इसका प्रमुख तत्व है। सूर्य प्रमुख रूप से अग्नि प्रधान ग्रह है और सूर्य का रत्न माणिक्य (रूबी) होता है। रूबी पहनने से व्यक्ति सफलता प्राप्त करता है। माणिक्य धन-दौलत, मान-सम्मान और यश दिलाता है। राजनेता, अधिकारी, डॉक्टर, इंजीनियर बनने और बड़े पदों पर पहुंचने के लिए माणिक्य पहनना चाहिए। सूर्य के लिए गुलाबी रंग के माणिक्य का इस्तेमाल सर्वोत्तम होता है।

कौन पहनें सूर्य रत्न माणिक्य

मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु मीन लग्न वाले माणिक्य पहन सकते हैं। जो लोग जुलाई के महीने या रविवार को पैदा हुए हैं उन्हें भी यह रत्न सूट करता है।

मूलांक के अनुसार, 1, 10, 19 और 28 तारीख को जन्म लेने वाले व्यक्ति भी माणिक्य रत्न पहन सकते हैं। सूर्य की महादशा हो तो माणिक्य पहन कर देख सकते हैं।

असली माणिक्य की पहचान कैसे करें

माणिक्य रत्न अनार के दाने के समान होता है। गाढ़े रंग का रत्न होता है। यह वजनी, भारी और ठंडा होता है। माणिक्य को आंखों पर रखेंगे तो ठंडक महसूस होगी। अगर अधिकारीगण माणिक्य रत्न पहनते हैं तो उनके ऑफिस में कोई परेशानियां नहीं होती हैं। माणिक्य पहनने वाला बीमार नहीं पड़ता है और घर में खुशहाली बनी रहती है। अगर माणिक्य सूट करता है तो राजा बना देता है।

किसके साथ पहनें माणिक्य रत्न

माणिक को मोती के साथ पहन सकते हैं, तो पुखराज के साथ भी पहन सकते हैं। मोती के साथ पहनने से पूर्णिमा नाम का योग बनता है। जबकि माणिक व पुखराज प्रशासनिक क्षेत्र में उत्तम सफलता का कारक होता है। माणिक व मूंगा भी पहन सकते हैं, ऐसा जातक प्रभावशाली व कोई प्रशासनिक क्षेत्र में सफलता पाता है। वृषभ लग्न में केन्द्र चतुर्थ का स्वामी होता है सूर्य कि स्थितिनुसार इस लग्न के जातक भी माणिक पहन सकते हैं। इसे पुखराज, मूंगा के साथ भी पहना जा सकता है। पन्ना व माणिक भी पहन सकते है, इसके पहनने से बुधादित्य योग बनता है। जो पहनने वाले को दिमागी कार्यों में सफल बनाता है। माणिक, पुखराज व पन्ना भी साथ पहन सकते हैं। माणिक के साथ नीलम व गोमेद नहीं पहना जा सकता है। सिंह लग्न में जब सूर्य पंचम या नवम भाव में हो तब माणिक पहनना शुभ रहता है।

सूर्य रत्न माणिक्य पहनने के मान्यता

ज्योतिषशास्त्री चन्द्रप्रभा बताती हैं कि, माणिक्य के विषय में मान्यता है कि जो व्यक्ति इसे धारण करता है वह अगर गंभीर रूप बीमार होने वाला होता है तो इसका रंग फीका हो जाता है। अगर व्यक्ति की मृत्यु होने वाली होती है तो करीब तीन महीने पहले से माणिक्य का रंग सफेद होने लग जाता है। माणिक्य के विषय में यह भी मान्यता है कि पति-पत्नी दोनों अगर इसे धारण करते हैं तो पत्नी के बेवफाई करने पर पति द्वारा धारण किये गये माणिक्य का रंग फीका पड़ जाता है। ठीक इसी तरह पति बेवफाई करे तो पत्नी द्वारा धारण किये गये माणिक्य का रंग फीका पड़ जाता है। माणिक्य में रक्त संबंधी रोगों को दूर करने की क्षमता है। तपेदिक से पीड़ित व्यक्ति अगर इसे धारण करे तो चिकित्सा का लाभ तेजी से प्राप्त होता है।

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