माँ चंद्रघंटा

माँ चंद्रघंटा – नवरात्र का तीसरा दिन माँ दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा विधि

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स्त्री हमारे समाज का वह हिस्सा है जिसके बिन सब अधूरा है । इनके बिना समाज की कल्पना करना ही पाप है । यह आपकी माँ होती है आपकी बहन होती है और आपकी हमसफ़र भी कहलाई जाती है । स्त्री पुरुष के उथल पुथल संसार में शांति लाती है जिससे पुरुष कोसों दूर रहता है । स्त्री अब हर वर्ग हर क्षेत्र में पुरुष से कदम मिलाके चल रही हैं । भारत मे स्त्री को देसी स्वरूप माना गया है । देवी दुर्गा माँ जो अपने भक्तों की हर कामना पूर्ण करती है। जिनके नौ रूपो की हम आराधना करते हैं । नवरात्र का त्योहार दुर्गा माँ के नौ रूपो की आराधना करने का त्योहार है । नवरात्रि एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है ‘नौ रातें’। इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान, शक्ति / देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। दसवाँ दिन दशहरा के नाम से प्रसिद्ध है। नवरात्रि वर्ष में चार बार आता है। पौष, चैत्र,आषाढ,अश्विन प्रतिपदा से नवमी तक मनाया जाता है। नवरात्रि के नौ रातों में तीन देवियों – महालक्ष्मी, महासरस्वती या सरस्वती और दुर्गा के नौ स्वरुपों की पूजा होती है जिन्हें नवदुर्गा कहते हैं।

माँ ब्रह्मचारिणी – नवरात्र का दूसरा दिन माँ दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा विधि

नवरात्र व्रत यह हिन्दू परम्परा में ऐसे नौ रातों में फैला त्योहार है । इन नौ रातों में देवी शक्ति के नौ स्वरूपों की पूजा आराधना होती है और दसवां दिवस दशहरा के नाम से प्रसिद्ध है।

माँ चंद्रघंटा (माँ का तीसरा रूप)

नवरात्र में माँ के नौ रूपो का आशीर्वाद लिया जाता है । इन्ही नौ रूपों में तीसरा रूप माँ चंद्रघंटा के नाम दर्ज है । माँ चंद्रघंटा के माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी लिए इन्हें चंद्रघंटा कहाजाता है। इनका शरीर स्वर्ण के समान उज्ज्वल है, इनके दस हाथ हैं। दसोंहाथों में खड्ग, बाण आदि शस्त्र सुशोभित रहते हैं। इनका वाहन सिंह है। माँ अपने भक्तो की इच्छा जल्द पूर्ण करती है । इनकेघंटे की ध्वनि सदा अपने भक्तों को प्रेतबाधा से रक्षा करती है। नवरात्रि उपासनामें तीसरे दिन की पूजा का अत्यधिक महत्व है और इस दिन इन्हीं के विग्रह कापूजन-आराधन किया जाता है। इस दिन साधक का मन ‘मणिपूर’ चक्र में प्रविष्टहोता है।

पूजा विधि

माँ चन्द्रघण्टा की पूजा आराधना करने के लिए माता की चौकी पर माँ की तस्वीर या मूरत की स्थापना करें । इसके बाद गंगाजल से शुद्धिकरण करें । चौकी पर चांदी,  तांबे या मिट्टीके घड़े में जल भरकर उस पर नारियल रखकर कलश स्थापना करें। इसके बाद पूजन का संकल्प लें और वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारामां चंद्रघंटा सहित समस्त स्थापित देवताओं की षोडशोपचार पूजा करें। इसमेंआवाहन, आसन, पाद्य, अध्र्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधितद्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा, मंत्रपुष्पांजलि आदि करें। तत्पश्चात प्रसाद वितरण कर पूजन संपन्न करें। मां को केसर और केवड़ा जल से स्नान करायें। मां को सुनहरे या भूरे रंग के वस्त्र पहनाएं और खुद भी इसी रंग के वस्त्र पहनें। केसर-दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगाएं। मां को सफेद कमल और पीले गुलाब की माला अर्पण करें। पंचामृत, चीनी व मिश्री का भोग लगाएं। मां का आर्शीवाद पाने के लिए इस मंत्र का 108 बार जाप करने से फायदा मिलेगा।

“या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमो नमः।”

श्री दुर्गा सप्तशती पाठ की सही विधि-आप कैसे करते हैं?

माँ और बच्चों का रिश्ता संसार का सबसे अनमोल रिश्ता माना गया है। मां से कुछ भी प्रेम भावना से मांगो तो माँ अवश्य उस मांग को पूर्ण करती है। तभी माँ के भक्त रूपी बच्चे नवरात्रों का इंतजार बेसब्री से करते हैं।

देवी चंद्रघंटा की आरती

जय माँ चन्द्रघंटा सुख धाम

पूर्ण कीजो मेरे काम

चन्द्र समान तू शीतल दाती

चन्द्र तेज किरणों में समाती

क्रोध को शांत बनाने वाली

मीठे बोल सिखाने वाली

मन की मालक मन भाती हो

चन्द्र घंटा तुम वरदाती हो

सुंदर भाव को लाने वाली

हर संकट मे बचाने वाली

हर बुधवार जो तुझे ध्याये

श्रद्धा सहित जो विनय सुनाय

मूर्ति चंदर आकार बनाये

सन्मुख घी की ज्योत जलाये

शीश झुका कहे मन की बाता

पूर्ण आस करो जगदाता

कांची पुर स्थान तुम्हारा

करनाटिका मे मान तुम्हारा

नाम तेरा रटू महारानी

‘चमन’ की रक्षा करो भवानी

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