खंडित मूर्ति

शास्त्रों के अनुसार खंडित मूर्ति (Khandit Murti) का क्या करना चाहिए?

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ईश्ववर हर कण कण में मौजूद हैं। यह वाक्य भारत में बेहद प्रसिद्ध है, तभी भारत देश मे प्रत्येक व्यक्ति इस बात में मान्यता रखता है कि मूरत में ईश्वर वास करते हैं। यह पूर्ण चर्चा विश्वास पर टिकी है। विश्वास है तो भगवान है नहीं तो नहीं है।

इसी विश्वास के चलते व्यक्ति एक आम सी पत्थर की मूर्ति में भगवान की तस्वीर समझ बात करता है और यह भी कामना करता है कि भगवान उसकी हर मनोकामना पूर्ण करें और उसे हर मुसीबत में साथ दें। ईश्वर एक ऐसी अद्धभुत ताकत हैं जिनके केवल नाम से व्यक्ति अपने भीतर अटूट ताकत का संचार कर लेता है तभी हर व्यक्ति अपने घर मे ईश्वर को रखना चाहता है। इसीलिए वह भगवान की मूरत ले आता है, प्रत्येक घर मे अलग अलग आकार के भगवान की मूरत भगवान की उम्र को दर्शाता है। अर्थात मूरत के रूप में ही ईश्ववर भिन्न भिन्न घर में अपना बचपन फिर से जीते हैं, बचपन के साथ साथ वह सैंकड़ो माता- पिता एवं भाई और बहन का प्यार भी प्राप्त करते हैं।

हिन्दू धर्म मे मूर्ति पूजन (Murti poojan) को विशेष स्थान हासिल है परन्तु यह भी सब जानते हैं कि आखिर में वह मूरत वास्तव में एक पत्थर जो गिरने पर या किसी भी अवस्था मे टूट सकती है। कभी-कभी परिवार के सदस्यों की लापरवाही या अन्य किसी कारण के चलते भगवान की मूर्ति टूट (Murti tootna) जाती है या फोटो फट जाते हैं, खराब हो जाते हैं।

विद्वानों के अनुसार ऐसा होना अपशकुन माना जाता है। यदि ऐसा होता है तो इष्टदेव से जाने-अनजाने हुई भूल के लिए क्षमा याचना करना चाहिए। हनुमान चालिसा (Hanuman Chalisa) का पाठ करना चाहिए। इसके साथ ही टूटी मूर्ति या खराब फोटो को उस समय किसी ऐसे स्थान पर रख देना चाहिए जहां उन पर किसी की पैर न लगे। इस प्रकार की मूर्ति या फोटो को घर में या पूजन स्थान में नहीं रखना चाहिए। यहाँ टूटने को खंडित शब्द से संबोधन किया जाता है। हिन्दू धर्म मे मूर्ति खंडन (Murti Khandan) को गलत माना गया है। किसी भी प्रकार से खंडित मुर्ति की पूजा करना अपशगुन माना गया है।

खंडित मूर्ति किसे कहते हैं, इसे क्या करना चाहिए

मंदिर में रखी दूषित मूर्तियों के बारे में सबसे पहले आप ये जान लें कि दूषित मूर्तियां किन्हें कहते हैं। कई बार जाने अनजाने में भगवान की कोई मूर्ति हाथ से छूट जाती है जिससे उसमें दरार आ जाती है या फिर मूर्ति का कुछ हिस्सा टूट जाता है। ऐसी मूर्तियों को ही दूषित या खंडित मूर्ति कहा जाता है।

वास्तु शास्त्र के मुताबिक ऐसी मूर्तियों को मंदिर में नहीं रखना चाहिए। ऐसी मूर्तियों को या तो किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए या फिर मंदिर में किसी पीपल के पेड़ के नीचे रख देना चाहिए। क्योंकि घर में भगवान की दूषित मूर्तियां रखने से वास्तु दोष (Vastu Dosh) लगता है और नकारात्मकता बनी रहती है। सिर्फ मूर्ति ही नही बल्कि दूषित या खंडित दीपक का भी कभी इस्तेमाल ना करें क्योंकि इससे घर में दरिद्रता छा जाती है।

  • जब किसी मूर्ति को घर में लाया जाता है तो माना जाता है कि उसमें देवत्व वास करता है और यहीं कारण है कि जब मूर्ति टूटती है तो लोग घबरा जाते है और किसी अनिष्ट का भाव अपने मन में ले आते है।
  • अगर आपके साथ भी कभी ऐसा हो जाएँ तो आप मूर्ति को अक्षत के साथ बहते पानी में विसर्जित कर दें। इससे उसका देवत्व चला जाता है और आपका डर भी कम हो जाएगा।
  • अगर हम रोजाना खंडित मूर्ति या आभाहीन मूर्ति के दर्शन व पूजा करते है तो उससे घर, व्यापार और मान की हानि होती है।
  • घर के मंदिर में देवी देवताओं की ऐसी मूर्ति रखने की सलाह दी जाती है जिनका मुख्य सौम्य हो और जिनके हाथों की मुद्रा इस प्रकार हो की वे आपको आशीर्वाद दे रहे हो।
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