किस्मत क्या है

किस्मत क्या है? क्या भाग्य बदला जा सकता है?

सफलता यह जीवन की एक मात्र पूंजी है जिसमे हर व्यक्ति निवेश करना चाहता है। कहा जाता है सफलता तक पहुंचने का मार्ग व्यक्ति के मेहनत से होकर निकलता है परन्तु किसी कारण अगर व्यक्ति असफल हो जाता है तो व्यक्ति अपनी किस्मत को कटघरे में उतार देता है। व्यक्ति स्वयं के किस्मत पर दोष डाल देता है।

अक्सर कर्म और किस्मत के बीच लोगो मे मतभेद की स्थिति बनी रहती है। प्राचीन वेदो मे किस्मत और कर्म को दो अलग-अलग पहलु के रुप मे बताया गया है जो कभी न कभी हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं। यह विषय थोड़ा जटिल और मुश्किल है।

मनुष्य ने जब से इस धरती पर अपने कदम रखे हैं तब से उसे अपने वास्तविक जीवन में नही बल्कि अपने आने वाले कल के ऊपर ध्यान केंद्रित करता है। हर व्यक्ति का पूरा ध्यान केवल किस्मत को दोष देने में व्यस्त रहता है परन्तु कभी किसी ने किस्मत का मूल अर्थ जानने का प्रयास नहीं किया। किस्मत के बारे मे तो मे हर मनुष्य थोड़ी बहुत जानकारी रखता है, कहते हैं जब हम कड़े परिश्रम करने के बाद सफलता प्राप्त करते है तो वह हमारे कर्म है लेकिन जब हम बिना मेहनत के बावजूद सफलता प्राप्त करते हैं उसे किस्मत कहते है। सत्य तो यह है कि बिना मेहनत और प्रयास के कुछ भी संभव नही, लेकिन अगर किस्मत आपका साथ नही देगी तो आपकी हर मेहनत व्यर्थ जाएगी।

कर्म या किस्मत

किस्मत का तमगा उस मनुष्य को प्राप्त होता है जिसके सफल होने का विश्वास विरोधियों को नहीं होता। विरोधी उस जितने वाले मनुष्य की जीत को किस्मत बताकर नीचा दिखा देते हैं।

किस्मत क्या हैं और इसका मूल अर्थ

किस्मत कहें या भाग्य इसका सीधा संबंध ब्रह्मांड से है। लेकिन संपूर्ण ब्रह्मांड को समझना लगभग नामुमकिन है, इसलिए हम केवल वही समझने कि कोशिश करेंगे जिसका संबंध आपसे या आपके भाग्य से है। मनुष्य ने अपने ज्ञान के आधार पर ब्रह्मांड में 12 राशियों, 27 नक्षत्रों और 9 ग्रहों की पहचान की है।

ब्रह्मांड को 360 डिग्री माना गया है इस आधार पर प्रत्येक राशि को 30 डिग्री और प्रत्येक नक्षत्र को 13डिग्री . 20“कला में बांटा गया है। इन राशियों और नक्षत्रों में ही हमारा सौमंडल, उसमें मौजूद सभी 9 ग्रह, सूर्य और चंद्रमा भ्रमण करते है। ये राशियां और नक्षत्र भी अपनी धुरी पर लगातार विचरण कर रहे है।

हमारे पूर्वजों के अनुसार व्यक्ति के किस्मत का फैसला उसकी जन्म से ही हो जाता है। व्यक्ति की किस्मत उसके जन्म के समय और दिन और साल के मुताबिक तय होते हैं। अर्थात व्यक्ति की कुंडली मे ही किस्मत का ब्यौरा होता है। जिसमें प्रत्येक व्यक्ति अपनी स्वयं की कुण्डली से पता लगा सकता है कि उसका शुभ समय कब आएगा या म्रत्यु के लक्षण कब आएंगे।

क्या भाग्य बदल सकते हैं

व्यक्ति की किस्मत या भाग्य का फैसला उसके जन्म से ही हो जाता है। किस्मत आपके जन्म समय एवं दिन पर निर्धारित है, जिस प्रकार व्यक्ति पैदा होने के बाद स्वंय का जन्म समय नहीं बदल सकता ठीक उसी तरह वह स्वयं का भाग्य भी नहीं बदल सकता। हालांकि यह कहना कि व्यक्ति नहीं बदल सकता अपना भाग्य, यह अतिशयोक्ति होगी।

इंसान ही संसार में मौजूद ऐसा पशु है, जो चाहे तो कुछ भी कर सकता है। मेहनत ही एक मात्र मार्ग है, जिसके प्रतिदिन करने से व्यक्ति अपना भाग्य में सफलता का परिचय करा सकता है। लेकिन यहां इस बात को स्पष्ट करना जरूरी है कि हम अपने भाग्य से जुड़ी अच्छी-बुरी परिस्थिति को सिर्फ प्रभावित कर सकते है जिससे उसके बुरे परिणामों की तीव्रता और अवधि को कम और अच्छे परिणामों की अवधि और तीव्रता को बढ़ाया जा सके।

ऐसे कई उपाय वैदिक ज्योतिष शास्त्र अपने अंदर संजोए बैठा है। इन उपायों का लाभ विद्वान और ज्ञानी लोग प्रचीन समय से ही उठाते आएं है। इन उपायों में ऊर्जावान रत्न, वैदिक यंत्र, रूद्राक्ष, वैदिक उपाय किट जैसे साधनों से आप भी अपने भाग्य के अच्छे बुरे प्रभावों को नियंत्रित कर सकते है। लेकिन इन उपायों के उपयोग के पहले आपको अनुभवी और सटीक सलाह की आवश्यकता होगी जो आपकी मौजूदा समस्याओं को जानकर भविष्य के गर्भ की टोह ले सके। आपकी कुंडली का अध्ययन कर आपको आने वाली परेशानियों के प्रति सजग करते हुए उनका प्रभाव कम करने के लिए मार्ग प्रदर्शित कर सके।

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