अनंत चतुर्दशी

अनंत चतुर्दशी 2019 – जानें अनंत चतुर्दशी पूजा का सही समय

श्रिष्टि के रचनाकार भगवान विष्णु जिन्होंने इस धरती पर दशावतार लिए और अपना लीला रच कर इस पावन धरती को उन दुष्ट पापों से बचाया । भगवान विष्णु के अवतार में अयोध्या के श्रीराम और नटखट श्रीकृष्ण जी की मौजूदगी है । शांति प्रिय गौतम बुद्ध का भी इनके अवतार में शामिल है । भगवान परशुराम जी को भला कौन भूल सकता है । जिनका गुस्सा इतना मशहूर था कि गणेश जी को एक दन्त कहलवाने में अहम भूमिका निभा आए । भगवान विष्णु अपने भक्तों की हर मांग को स्वीकार करते है इसीलिए तो वह अपने भक्तों के हमेशा प्रिय रहे हैं । भक्त भी उनसे दुआ मांगने का कोई मौका नही छोड़ते । वह भगवान को खुश करने के लिए कठोर तप एवं व्रत रखते हैं ताकि वह अपने परिवार का स्वास्थ्य एवं धन लक्ष्मी की कृपा की मांग कद सके । भादों यानि भाद्रपद मास के व्रत व त्यौहारों में एक व्रत इस माह की शुक्ल चतुर्दशी को मनाया जाता है। जिसे अनंत चतुर्दशी कहा जाता है। इस दिन अनंत यानि भगवान श्री हरि यानि भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। साथ ही सूत या रेशम के धागे को चौदह गांठे लगाकर लाल कुमकुम से रंग कर पूरे विधि विधान से पूजा कर अपनी कलाई पर बांधा जाता है। इस धागे को अनंत कहा जाता है जिसे भगवान विष्णु का स्वरूप भी माना जाता है। मान्यता है कि यह अनंत रक्षासूत्र का काम करता है। भगवान श्री हरि अनंत चतुर्दशी का उपवास करने वाले उपासक के दुखों को दूर करते हैं और उसके घर में धन धान्य से संपन्नता लाकर उसकी विपन्नता को समाप्त कर देते हैं।

कथा अनंत चतुर्दशी तिथि की

दीक्षा नाम की एक सुंदर स्त्री जो कि सुमंत नामक ऋषि की अर्धांगिनी थी उन्होंने एक सुंदर सी पुत्री को जन्म दिया । जिसका नाम सबकी सहमति से सुशीला रखा गया । लेकिन वक्त का अजीब खेल तो देखिए कुछ ही वक्त पश्चात सुशीला से माँ का साया छीन गया दीक्षा स्वर्ग लोक सिधार गई।  अब ऋषि सुमंत अपने आप को असहाय महसूस करने लगे । बच्ची के लालन पालन में वह अकेले असमर्थ मालूम हो रहे थे इसीलिए उन्होंने दूसरी शादी रचाने का फैसला किया।  दूसरी शादी ऋषि सुमंत ने कर्कशा से किया जो अपने नाम सम्मान व्यवहार में कर्कश थी । भगवान के आशीर्वाद से बेटी सुशीला का बालक जीवन बीत गया और वह उम्र के जवानी पल में प्रवेश कर गई जहाँ उसके पिताजी ऋषि सुमंत को उसके विवाह की चिंता सताने लगी । सुशीला से विवाह के लिए एक ऋषि कौण्डिन्य से तय किया । हर पिता अपनी पुत्री का विवाह यह सोच कर करता है अब उसे जीवन मे कभी ज्यादा दिक्कत का सामना नहीं करना होगा । परन्तु सुशीला को शादी के पश्चात भी इस दृढ़ता का सामना करना पड़ा । उन्हें जंगलों में भटकना पड़ रहा था। एक दिन उन्होंने देखा कि कुछ लोग अनंत भगवान की पूजा कर रहे हैं और हाथ में अनंत रक्षासूत्र भी बांध रहे हैं। सुशीला ने उनसे अनंत भगवान की उपासना के व्रत के महत्व को जानकर पूजा का विधि विधान पूछा और उसका पालन करते हुए अनंत रक्षासूत्र अपनी कलाई पर भी बांध लिया। देखते ही देखते उनके दिन फिरने लगे। कौण्डिन्य ऋषि में अंहकार आ गया कि यह सब उन्होंने अपनी मेहनत से निर्मित किया है काफी हद तक सही भी था प्रयास तो बहुत किया था। अगले ही वर्ष ठीक अनंत चतुर्दशी की बात है सुशीला अनंत भगवान का शुक्रिया कर उनकी पूजा आराधना कर अनंत रक्षासूत्र को बांध कर घर लौटी तो कौण्डिन्य को उसके हाथ में बंधा वह अनंत धागा दिखाई दिया और उसके बारे में पूछा। सुशीला ने खुशी-खुशी बताया कि अनंत भगवान की आराधना कर यह रक्षासूत्र बंधवाया है इसके पश्चात ही हमारे दिन बहुरे हैं। इस पर कौण्डिन्य खुद को अपमानित महसूस करने लगे कि उनकी मेहनत का श्रेय सुशीला अपनी पूजा को दे रही है। उन्होंने उस धागे को उतरवा दिया। इससे अनंत भगवान रूष्ट हो गये और देखते ही देखते कौण्डिन्य अर्श से फर्श पर आ गिरे। तब एक विद्वान ऋषि ने उन्हें उनके किये का अहसास करवाया और कौण्डिन्य को अपने कृत्य का पश्चाताप करने की कही। लगातार चौदह वर्षों तक उन्होंने अनंत चतुर्दशी का उपवास रखा उसके पश्चात भगवान श्री हरि प्रसन्न हुए और कौण्डिन्य व सुशीला फिर से सुखपूर्वक रहने लगे।

चतुर्दशी व्रत का महत्व

अनंत चतुर्दशी व्रत का महत्व हिन्दू धर्म मे काफी इज्जत और सम्मान के साथ लिया जाता है । इसके करने से व्रत रखने वालों के हद कष्ट का निवारण हो जाता है । भगवान गणेश का घर से विदाई का समय भी इसी दिन किया जाता है एवं जैन धर्म मे भी दशलक्षण पर्व का समापन भी शोभायात्राएं निकालकर भगवान का जलाभिषेक कर इसी दिन किया जाता है।

कब है 2019 में अनंत चतुर्दशी तिथि

इस वर्ष यह तिथि 12 सितंबर को है इस व्रत में भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा होती है। भाद्रपद मास में शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी कहा जाता है। इस दिन अनंत भगवान (भगवान विष्णु) की पूजा के पश्चात बाजू पर अनंत सूत्र बांधा जाता है। ये कपास या रेशम से बने होते हैं और इनमें चौदह गाँठें होती हैं। अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन भी किया जाता है इसलिए इस पर्व का महत्व और भी बढ़ जाता है। भारत के कई राज्यों में यह पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। इस दौरान कई जगहों पर धार्मिक झांकियॉं निकाली जाती है।

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